Tempsens Instruments का IPO निवेशकों के बीच जबरदस्त हिट रहा! कंपनी का ₹650 करोड़ का इश्यू 28 गुना से ज़्यादा सब्सक्राइब हुआ है। वहीं, ग्रे मार्केट (Grey Market) के संकेत बता रहे हैं कि लिस्टिंग के दिन शेयर **104%** तक चढ़ सकता है।
IPO में निवेशकों का भरोसा
Tempsens Instruments India Limited के ₹650 करोड़ के इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) में निवेशकों ने दिल खोलकर पैसा लगाया है। 24 अगस्त 2026 को बंद हुए इस इश्यू को 28 गुना से ज़्यादा की सब्सक्रिप्शन मिली है, जो इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के स्टॉक्स के प्रति बाज़ार के मौजूदा रुझान को दिखाता है।
20 अगस्त 2026 को खुले इस IPO का प्राइस बैंड ₹285 से ₹300 प्रति शेयर था। अंतिम दिन तक, कंपनी को 1.51 करोड़ शेयरों के मुकाबले 43 करोड़ से ज़्यादा शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इनमें नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Non-Institutional Investors) की तरफ से खासी मांग देखी गई। पब्लिक इश्यू शुरू होने से पहले ही, कंपनी ने एंकर इन्वेस्टर्स (Anchor Investors) से ₹194.55 करोड़ जुटाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी।
कंपनी की वित्तीय स्थिति और फंड का इस्तेमाल
फाइनेंशियल ईयर 2026 के अंत तक, Tempsens Instruments ने ₹444.88 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के ₹378.53 करोड़ से ज़्यादा है। वहीं, नेट प्रॉफिट भी बढ़कर ₹71.07 करोड़ हो गया, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर में यह ₹62.55 करोड़ था। इस IPO में ₹95 करोड़ का फ्रेश इश्यू (Fresh Issue) और ₹555 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale) शामिल है। कंपनी इस पैसे का इस्तेमाल मुख्य रूप से ₹55 करोड़ के कर्ज को चुकाने और अपने इलेक्ट्रिकल हीटिंग व स्पेशलाइज्ड केबल बिजनेस के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) में ₹18.13 करोड़ लगाने की योजना बना रही है।
बाज़ार की चाल और जोखिम (Market Sentiment and Risks)
फिलहाल ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लगभग ₹313 के आसपास चल रहा है, जो इश्यू प्राइस पर 104% के संभावित लिस्टिंग गेन का इशारा कर रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ग्रे मार्केट की दरें अनौपचारिक और अस्थिर होती हैं, और ये स्टॉक एक्सचेंज पर वास्तविक लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं देती हैं।
लिस्टिंग की उम्मीदों के अलावा, कंपनी के बिजनेस से जुड़े जोखिमों को समझना भी अहम है। Tempsens Instruments मुख्य रूप से उदयपुर (Udaipur) में स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर निर्भर है, इसलिए किसी भी स्थानीय समस्या का संचालन पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसके अलावा, कंपनी का महत्वपूर्ण रेवेन्यू एक्सपोर्ट (Exports) से आता है, जो उसे फॉरेन एक्सचेंज रिस्क (Foreign Exchange Risks) के दायरे में लाता है। यह बिजनेस मेटल्स (Metals) और पावर (Power) जैसे उद्योगों की साइक्लिकल डिमांड (Cyclical Demand) के प्रति भी संवेदनशील है और कच्चे माल की स्थिर सप्लाई और कीमतों पर निर्भर है। इन क्षेत्रों में कोई भी बदलाव भविष्य की कमाई को प्रभावित कर सकता है।
IPO आवेदकों के लिए अगला बड़ा कदम शेयर अलॉटमेंट (Share Allotment) की प्रक्रिया होगी। यह शेयर 28 अगस्त 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्ट होने की उम्मीद है। निवेशकों को अलॉटमेंट स्टेटस और फाइनल लिस्टिंग प्राइस पर नज़र रखनी चाहिए ताकि यह समझा जा सके कि बाज़ार इस शुरुआती उत्साह को कितना बनाए रखता है।
