Sotefin Bharat का ₹90 करोड़ का IPO 16 जुलाई को खुला और पहले दिन सिर्फ 22% सब्सक्राइब हुआ। रिटेल निवेशकों ने 37% की भागीदारी दिखाई, लेकिन संस्थागत निवेशकों ने अभी तक एंट्री नहीं ली है। यह इश्यू 20 जुलाई तक खुला रहेगा और जुटाई गई राशि का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और वर्किंग कैपिटल के लिए किया जाएगा।
IPO में निवेशकों की भागीदारी
ऑटोमेटेड कार पार्किंग सिस्टम बनाने वाली कंपनी Sotefin Bharat का ₹90 करोड़ का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 16 जुलाई को बाजार में आया, लेकिन पहले दिन उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ पाया। कुल उपलब्ध 34.32 लाख शेयरों में से पहले दिन केवल 7.57 लाख शेयरों के लिए बोलियां आईं, यानी इश्यू सिर्फ 22% ही सब्सक्राइब हो पाया।
किस कैटेगरी से कितनी दिलचस्पी?
रिटेल निवेशकों (Retail Investors) ने अपने लिए आरक्षित कोटे का 37% सब्सक्राइब किया। वहीं, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) ने 17% हिस्सेदारी ली। खास बात यह है कि पहले दिन किसी भी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर (QIB) की ओर से कोई बोली नहीं आई। QIBs आमतौर पर इश्यू के अंतिम दिनों में निवेश करते हैं। यह IPO 20 जुलाई को बंद हो जाएगा।
IPO से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल
Sotefin Bharat इस इश्यू से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल कई अहम कामों के लिए करेगी। कंपनी कोलकाता में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने पर ₹20.12 करोड़ खर्च करेगी, जिससे पार्किंग सॉल्यूशंस की प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ेगी। इसके अलावा, ₹8.17 करोड़ ऑफिस स्पेस खरीदने में लगाए जाएंगे। ₹40 करोड़ का बड़ा हिस्सा वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए रखा गया है, ताकि कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज सुचारू रूप से चल सकें। बाकी बची राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
एंकर बुक में मिली ₹25.58 करोड़ की बोली
सार्वजनिक इश्यू खुलने से पहले, 15 जुलाई को कंपनी ने एंकर बुक (Anchor Book) के जरिए ₹25.58 करोड़ जुटाए थे। इसमें Aidos India Fund, Getfive Opportunity Fund और Steptrade Revolution Fund जैसे निवेशकों ने पैसा लगाया था। इस इश्यू के लिए Choice Capital Advisors लीड मर्चेंट बैंकर है।
आगे क्या?
हालांकि पहले दिन की सब्सक्रिप्शन संख्या धीमी है, लेकिन ग्रे मार्केट (Grey Market) में शेयर 10% से ज्यादा के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। निवेशकों को ग्रे मार्केट की अटकलों और असली सब्सक्रिप्शन डेटा के बीच अंतर समझना चाहिए। इश्यू के बाकी दिनों में संस्थागत निवेशकों की भागीदारी पर नजर रहेगी, क्योंकि यह कंपनी के लॉन्ग-टर्म बिजनेस मॉडल पर भरोसे का संकेत देगा।
