Sonaselection India का **₹141.57 करोड़** का IPO बाजार में खुल गया है, लेकिन पहले दिन निवेशकों का रिस्पॉन्स काफी सुस्त रहा। कंपनी के रेवेन्यू में उछाल के बावजूद नेगेटिव कैश फ्लो और राजस्थान पर निर्भरता निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
IPO की डिटेल्स और मार्केट रिस्पॉन्स
Sonaselection India का IPO सब्सक्रिप्शन के लिए खुल चुका है और कंपनी इसके जरिए बाजार से ₹141.57 करोड़ जुटाना चाहती है। 21 सितंबर, 2026 तक खुले रहने वाले इस इश्यू के लिए कंपनी ने प्राइस बैंड ₹94 से ₹99 प्रति शेयर तय किया है। पहले दिन की क्लोजिंग तक इसे केवल 0.35 गुना ही सब्सक्राइब किया गया है, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।
फाइनेंशियल सेहत पर सवाल
कंपनी ने FY24 से FY26 के बीच 107% का शानदार रेवेन्यू CAGR दर्ज किया है, लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू थोड़ा डरावना है। सबसे बड़ी चिंता 'नेगेटिव नेट ऑपरेटिंग कैश फ्लो' है, जो FY26 में ₹110 करोड़ तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि कंपनी अपने कोर बिजनेस से जितना पैसा कमा रही है, उससे कहीं ज्यादा ऑपरेशंस और वर्किंग कैपिटल में खर्च हो रहा है।
भौगोलिक जोखिम (Geographic Concentration)
कंपनी का कामकाज काफी हद तक राजस्थान के भीलवाड़ा पर टिका है। FY26 में कुल रेवेन्यू का 37.3% और कच्चे माल की खरीद का 96% हिस्सा यहीं से आता है। इस तरह की एकाग्रता कंपनी को किसी भी स्थानीय नीतिगत बदलाव या क्षेत्रीय व्यवधान के प्रति संवेदनशील बनाती है।
क्या है वैल्युएशन का गणित?
IPO को FY26 की कमाई के 16.5 गुना पर पेश किया गया है। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स इसे विस्तार को देखते हुए सही मान रहे हैं, लेकिन ग्राहकों के साथ लंबे समय के सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स न होना एक अनिश्चितता पैदा करता है। साथ ही, इन्वेंट्री और रिसीवेबल्स में क्रमशः 109 और 73 दिन का समय फंसना इस बात का संकेत है कि कंपनी की काफी पूंजी ऑपरेशंस में ही अटकी हुई है। भविष्य में निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि क्या कंपनी अपने कैश साइकिल को सुधार पाती है या नहीं।
