Skyways Air Services के शेयर बाजार में कदम रखते ही निवेशकों को झटका लगा। IPO प्राइस **₹138** के मुकाबले शेयर **₹124** पर लिस्ट हुआ। 71 गुना सब्सक्रिप्शन के बावजूद शेयर ने डिस्काउंट पर एंट्री ली है, जिसका मुख्य कारण कंपनी का भारी कर्ज और कम मार्जिन है।
बाजार में निराशाजनक शुरुआत
Skyways Air Services की पब्लिक मार्केट में एंट्री काफी चुनौतीपूर्ण रही। NSE पर शेयर ₹124 और BSE पर ₹124.50 के स्तर पर ओपन हुए। IPO प्राइस ₹138 की तुलना में यह करीब 10% की बड़ी गिरावट है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस IPO को 71 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब किया गया था, लेकिन ग्रे मार्केट का उत्साह शेयर बाजार में लिस्टिंग के समय नहीं दिख पाया।
कर्ज का बोझ और फाइनेंशियल स्थिति
कंपनी ने इस IPO के जरिए ₹582.80 करोड़ जुटाए हैं। इसमें से ₹216.78 करोड़ का इस्तेमाल पुराने कर्ज को चुकाने में किया जाएगा। कंपनी पर ग्रॉस डेट (Gross Debt) करीब ₹505 करोड़ था, जिसे कम करना प्राथमिकता है। इसके अलावा ₹130 करोड़ वर्किंग कैपिटल के लिए रखे गए हैं। लॉजिस्टिक्स सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए इतना भारी कर्ज ग्रोथ में बाधा बन सकता है।
मार्जिन का दबाव और चुनौतियां
लॉजिस्टिक्स और फ्रेट फॉरवर्डिंग का बिजनेस बहुत ही कॉम्पिटिटिव है। आमतौर पर इस सेक्टर में EBITDA मार्जिन 4% से 4.5% के बीच रहता है। इतने पतले मार्जिन के साथ काम करना मुश्किल होता है क्योंकि ग्लोबल ट्रेड और फ्रेट रेट्स में जरा सा भी बदलाव सीधे प्रॉफिट पर चोट करता है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कंपनी इस जुटाई गई पूंजी का उपयोग करके अपनी बैलेंस शीट को कितना मजबूत बना पाती है। आने वाली तिमाही नतीजों (Quarterly Results) में कर्ज चुकाने की रफ्तार और प्रॉफिट मार्जिन में सुधार पर सबकी नजर रहेगी। शेयर की आगे की चाल केवल सब्सक्रिप्शन पर नहीं, बल्कि कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर निर्भर करेगी।
