Shree Ram Twistex IPO: निवेशकों की लगी झड़ी, 43 गुना से ज़्यादा सब्सक्रिप्शन! कंपनी अब 'ग्रीन एनर्जी' पर करेगी बड़ा दांव

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Shree Ram Twistex IPO: निवेशकों की लगी झड़ी, 43 गुना से ज़्यादा सब्सक्रिप्शन! कंपनी अब 'ग्रीन एनर्जी' पर करेगी बड़ा दांव
Overview

Shree Ram Twistex Ltd का IPO निवेशकों के ज़बरदस्त रिस्पॉन्स के साथ बंद हुआ है। 43.66 गुना सब्सक्रिप्शन मिलने के बाद, कंपनी अब ₹110.24 करोड़ जुटा चुकी है। इस फंड का इस्तेमाल कंपनी अब रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स, कर्ज चुकाने और वर्किंग कैपिटल को बढ़ाने में करेगी।

'ग्रीन एनर्जी' से लागत घटाने की बड़ी तैयारी!

Shree Ram Twistex Limited के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) को निवेशकों ने हाथों-हाथ लिया। यह इश्यू 43.66 गुना ओवर-सब्सक्राइब हुआ, जो मार्केट का कंपनी की भविष्य की योजनाओं पर भरोसा दिखाता है। IPO से जुटाए गए ₹110.24 करोड़ का बड़ा हिस्सा ग्रीन एनर्जी पर खर्च होगा। कंपनी 6.1 मेगावाट (MW) का सोलर पावर प्लांट और 4.2 मेगावाट (MW) का विंड पावर प्लांट लगाने जा रही है, जिसका इस्तेमाल कंपनी अपनी फैक्ट्री में बिजली की जरूरत के लिए खुद करेगी। इस कदम से मैन्युफैक्चरिंग में बिजली की महंगी लागत को कंट्रोल करने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा, इस फंड का कुछ हिस्सा कंपनी अपने मौजूदा कर्ज को कम करने और वर्किंग कैपिटल को मजबूत करने में भी लगाएगी। इस तरह, कंपनी लागत कम करने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी और बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए कर्ज घटाने, दोनों पर एक साथ फोकस कर रही है। हाल की वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी का रेवेन्यू फाइनेंशियल ईयर 23 में ₹213.58 करोड़ से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 25 में ₹256.32 करोड़ हो गया है। वहीं, नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹8.00 करोड़ हो गया है, जो पिछले दो सालों में 97.46% की जबरदस्त ग्रोथ दर्शाता है। कंपनी की यह स्ट्रेटेजी टेक्सटाइल इंडस्ट्री की साइक्लिकल नेचर से निपटने में मदद करेगी।

टेक्सटाइल सेक्टर की चुनौतियां और Shree Ram Twistex की पोजिशन

भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर देश की इकोनॉमी का एक अहम हिस्सा है, लेकिन इसे लगातार ग्लोबल कंपटीशन और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। Shree Ram Twistex कॉटन यार्न सेगमेंट में काम करती है, जहां मार्केट में ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन कई बड़े खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं और डिमांड प्राइस-सेंसिटिव है। इस सेक्टर में Ambika Cotton Mills, Damodar Industries और Rajapalayam Mills जैसी कंपनियां प्रमुख कंपटीटर हैं। आमतौर पर, इस सेक्टर के स्टॉक 8-14x के P/E मल्टीपल पर ट्रेड करते हैं, जो इसकी साइक्लिकलिटी को दर्शाता है।

Shree Ram Twistex के IPO का वैल्यूएशन, जो उसके फाइनेंशियल ईयर 25 की कमाई के मुकाबले करीब 29-30 गुना है, सेक्टर के एवरेज और पिछली वैल्यूएशन की तुलना में थोड़ा ज़्यादा लगता है। हालांकि, कंपनी के EBITDA मार्जिन में सुधार देखा गया है, जो 8-9% के आसपास स्थिर है और फाइनेंशियल ईयर 26 की पहली छमाही में 12.90% तक पहुंचा है। यह इस इंडस्ट्री में कॉम्पिटिटिव एज बनाने का एक अहम तरीका है, खासकर ऐसे सेक्टर में जहां मार्जिन अक्सर कम होते हैं। भारतीय टेक्सटाइल मार्केट भी लगातार बदल रहा है, जिसमें टेक्निकल टेक्सटाइल्स और सस्टेनेबल प्रैक्टिस पर जोर बढ़ रहा है।

⚠️ इन बातों का भी रखें ध्यान (Forensic Bear Case)

IPO में भले ही ज़बरदस्त सब्सक्रिप्शन मिला हो, लेकिन कुछ बातों पर गौर करना ज़रूरी है। टेक्सटाइल सेक्टर के लिए कंपनी का वैल्यूएशन, जो फाइनेंशियल ईयर 25 की कमाई के करीब 30 गुना है, काफी महंगा कहा जा सकता है। इसका मतलब है कि फ्यूचर ग्रोथ की उम्मीदें पहले से ही लिस्टिंग प्राइस में शामिल हो चुकी हैं। Shree Ram Twistex का ऑपरेशन मुख्य रूप से गुजरात पर केंद्रित है, जिससे यह क्षेत्रीय आर्थिक और रेगुलेटरी जोखिमों के प्रति संवेदनशील है। इसके अलावा, कंपनी घरेलू कॉटन सप्लायर्स पर निर्भर है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन में दिक्कतें आ सकती हैं।

वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट भी एक अहम मुद्दा है। हाल के सुधारों के बावजूद, कंपनी का ऑपरेशन ऐतिहासिक रूप से कैपिटल-इंटेंसिव रहा है, जिसमें फाइनेंशियल ईयर 23-25 के दौरान ग्रॉस करंट एसेट डेज़ 126 दिनों से ज़्यादा रहे हैं, और फाइनेंशियल ईयर 25 में इन्वेंटरी बढ़ने के कारण यह 159 दिनों तक पहुंच गया। साथ ही, 6.1 MW सोलर और 4.2 MW विंड पावर प्लांट के इंस्टॉलेशन में भी एग्जीक्यूशन रिस्क है, और इनका फाइनेंशियल इंपैक्ट समय पर और कुशल कमीशनिंग पर निर्भर करेगा। टेक्सटाइल इंडस्ट्री की अत्यधिक खंडित और प्रतिस्पर्धी प्रकृति, साथ ही ग्राहकों की पेमेंट पर निर्भरता, प्रॉफिटेबिलिटी और कैश फ्लो पर दबाव डाल सकती है। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में उतार-चढ़ाव भी एक सतर्क सेंटीमेंट का संकेत दे रहा है।

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