Shiprocket IPO: ₹1,617 करोड़ का इश्यू खुला, शेयर ₹92-97 के भाव पर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Shiprocket IPO: ₹1,617 करोड़ का इश्यू खुला, शेयर ₹92-97 के भाव पर

ई-कॉमर्स कंपनी Shiprocket का IPO आज सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। कंपनी ने शेयर का भाव ₹92 से ₹97 के बीच तय किया है। IPO से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी अपग्रेड, मार्केटिंग और कर्ज चुकाने में किया जाएगा। रिटेल निवेशक 14 अगस्त तक 154 शेयरों के लॉट पर बोली लगा सकते हैं।

Shiprocket IPO: सब्सक्रिप्शन आज से शुरू

ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म Shiprocket का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) आज, 12 अगस्त 2026, बुधवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। कंपनी ने अपने इक्विटी शेयर का प्राइस बैंड ₹92 से ₹97 तय किया है। इस IPO का कुल इश्यू साइज ₹1,617.48 करोड़ है, जिसमें ₹885.50 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹731.98 करोड़ का ऑफर-फॉर-सेल (OFS) कंपोनेंट शामिल है।

निवेशक न्यूनतम 154 शेयरों के लॉट साइज पर बोली लगा सकते हैं, जिसके लिए अपर प्राइस बैंड पर न्यूनतम निवेश ₹14,938 होगा। सब्सक्रिप्शन विंडो तीन दिनों के लिए खुली रहेगी और शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को बंद होगी। शेयरों की लिस्टिंग 19 अगस्त 2026 को NSE और BSE पर होने की उम्मीद है।

एंकर निवेशकों से मिला ₹727 करोड़

पब्लिक लॉन्च से पहले, Shiprocket ने मंगलवार को एंकर निवेशकों से ₹727.41 करोड़ जुटाए। एंकर बुक में SBI म्यूचुअल फंड, HDFC म्यूचुअल फंड, Nippon इंडिया म्यूचुअल फंड, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, गोल्डमैन सैक्स एसेट मैनेजमेंट और न्यूयॉर्क स्टेट टीचर्स रिटायरमेंट सिस्टम जैसे कई ग्लोबल और डोमेस्टिक संस्थागत निवेशकों ने भाग लिया।

IPO फंड का इस्तेमाल और बिज़नेस मॉडल

Shiprocket, जो पहले सिर्फ लॉजिस्टिक्स सर्विस प्रोवाइडर थी, अब एक ई-कॉमर्स एनेबलमेंट प्लेटफॉर्म बन गई है। यह डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स और छोटे व्यवसायों के लिए शिपिंग, कार्गो मैनेजमेंट, फुलफिलमेंट, क्रॉस-बॉर्डर लॉजिस्टिक्स और मार्केटिंग जैसे कई तरह के सर्विस देती है। कंपनी फ्रेश इश्यू से मिले फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से मार्केटिंग पहलों और टेक्नोलॉजी अपग्रेड में करेगी। फंड का एक हिस्सा कुछ खास उधारी को चुकाने या प्री-पे करने के लिए भी रखा गया है, जिससे कंपनी के बैलेंस शीट की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ने की उम्मीद है।

वित्तीय प्रदर्शन और रिस्क फैक्टर्स

कंपनी के वित्तीय आंकड़ों से पता चलता है कि उसके घाटे में कमी आ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) का घाटा FY24 में ₹351 करोड़ से घटकर FY26 में ₹76 करोड़ हो गया है। कंपनी लगभग ₹210 करोड़ का कर्ज चुकाने की योजना बना रही है, जिससे ब्याज लागत कम होगी और कुल कर्ज ₹242 करोड़ से घटकर ₹32 करोड़ रह जाएगा।

हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कंपनी का मुख्य शिपिंग बिजनेस तो प्रॉफिटेबल है, लेकिन इसके नए बिजनेस सेगमेंट अभी भी घाटे में हैं और इनमें लगातार पैसा लग रहा है। कंपनी का वैल्यूएशन इन नए क्षेत्रों में भविष्य की ग्रोथ की उम्मीदों पर आधारित है, जिनमें अभी तक लगातार प्रॉफिटेबिलिटी का ट्रैक रिकॉर्ड स्थापित नहीं हुआ है। इसके अलावा, कंपनी का बिजनेस मॉडल लॉजिस्टिक्स वर्कफ्लो को मैनेज करने के लिए विभिन्न थर्ड-पार्टी कूरियर प्रोवाइडर्स के साथ पार्टनरशिप पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है, जिससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) को ट्रैक करना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.