ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स कंपनी Shiprocket के IPO में दूसरे दिन बोलियां लगना जारी है। रिटेल इन्वेस्टर्स (Retail Investors) ने अपने हिस्से के मुकाबले **5 गुना** से ज्यादा का सब्सक्रिप्शन हासिल कर लिया है। हालांकि, कंपनी की **24%** रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद, जारी घाटे और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा पर भी निवेशकों की नजर है।
Shiprocket IPO: दूसरे दिन की बोलियां
ई-कॉमर्स शिपिंग कंपनी Shiprocket के इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) में दूसरे दिन बोलियां जारी हैं। दोपहर तक, 13 अगस्त 2026 को, IPO का कुल सब्सक्रिप्शन लगभग 1.58 गुना रहा। रिटेल इन्वेस्टर्स की ओर से भारी मांग देखी जा रही है, जिन्होंने अपने लिए आवंटित शेयरों से 5 गुना से भी ज्यादा बोली लगाई है। यह व्यक्तिगत निवेशकों का कंपनी में मजबूत विश्वास दिखाता है।
IPO का साइज और प्राइस बैंड
Shiprocket इस IPO के जरिए कुल ₹1,617.5 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। इस ऑफर में फ्रेश इश्यू (Fresh Issue) और ऑफर फॉर सेल (Offer For Sale) दोनों शामिल हैं। कंपनी ने प्रति शेयर ₹92 से ₹97 का प्राइस बैंड तय किया है। पब्लिक इश्यू खुलने से पहले, Shiprocket ने ₹727.41 करोड़ एंकर इन्वेस्टर्स (Anchor Investors) से जुटाए थे, जिनमें Goldman Sachs और Nomura जैसे ग्लोबल नाम भी शामिल हैं।
कंपनी की वित्तीय स्थिति: कमाई और घाटा
निवेशकों के लिए कंपनी के आंकड़े मिले-जुले हैं। एक तरफ, कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स (Revenue from Operations) में 24% की जोरदार बढ़ोतरी हुई है, जो फाइनेंशियल ईयर 2026 में ₹2,024.1 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, दूसरी ओर, कंपनी अभी भी घाटे में है। इसी अवधि के लिए ₹79.25 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया गया है। चूंकि कंपनी घाटे में चल रही है, इसलिए इसका ट्रेडिशनल प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो नहीं है, जो कि स्टॉक की वैल्यूएशन का एक अहम पैमाना होता है।
IPO से जुटाई राशि का इस्तेमाल
IPO से जुटाई गई राशि का एक बड़ा हिस्सा कंपनी अपने कर्ज को कम करने में इस्तेमाल करेगी। फ्रेश फंड्स में से ₹210 करोड़ मौजूदा उधारी चुकाने के लिए रखे गए हैं। इसके अलावा, ₹365.6 करोड़ टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और मार्केटिंग पर खर्च किए जाएंगे। ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स जैसे अत्यधिक प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में यह निवेश बेहद जरूरी है। कंपनी को कई अन्य खिलाड़ियों से मुकाबला करना है, और भविष्य की ग्रोथ के लिए लागत कम रखते हुए नेटवर्क का विस्तार करना महत्वपूर्ण होगा।
मुख्य जोखिम और चिंताएं
निवेशकों को कुछ खास जोखिमों को भी समझना चाहिए। मौजूदा मुनाफे की कमी के अलावा, कंपनी के ऑडिटर्स ने कंपनी के ऑडिट ट्रेल्स और आंतरिक नियंत्रणों (Internal Controls) को लेकर कुछ ऑडिट फ्लैग्स (Audit Flags) उठाए हैं। हालांकि, हाई-ग्रोथ स्टार्टअप्स के शुरुआती चरण में यह आम है, लेकिन यह गवर्नेंस (Governance) के लिहाज से एक संभावित जोखिम है। इसके अतिरिक्त, ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लगभग ₹34 है, जो लिस्टिंग पर संभावित लाभ का संकेत देता है, लेकिन यह एक अनौपचारिक और अस्थिर संकेतक है। यह गारंटी नहीं है कि स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने पर शेयर की कीमत वास्तव में बढ़ेगी।
आगे की राह
अब सबकी नजरें 14 अगस्त को IPO बंद होने तक के अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़ों पर होंगी। निवेशकों को इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Institutional Investors) की भागीदारी पर भी ध्यान देना चाहिए, जिन्होंने रिटेल निवेशकों की तुलना में थोड़ी धीमी प्रतिक्रिया दी है। अंतिम दिन उनकी भागीदारी कंपनी में दीर्घकालिक विश्वास का एक मजबूत संकेतक हो सकती है।
