Shanti Inorganics ने NSE Emerge प्लेटफॉर्म पर शानदार आगाज किया है। कंपनी का शेयर अपने **₹83** के इश्यू प्राइस के मुकाबले **₹157.70** पर लिस्ट हुआ, जो निवेशकों के लिए **90%** का बंपर मुनाफा है।
बाजार में धाकड़ शुरुआत
Shanti Inorganics की सोमवार, 7 सितंबर 2026 को शेयर बाजार में शानदार एंट्री हुई है। आईपीओ के प्रति निवेशकों के जबरदस्त उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह इश्यू 142 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था। कंपनी ने इस आईपीओ के जरिए कुल ₹47.24 करोड़ जुटाए हैं, जो पूरी तरह से नए शेयरों (Fresh Issue) के रूप में थे। यह राशि कंपनी अपने बिजनेस एक्सपेंशन और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों में इस्तेमाल करेगी।
कंपनी का कारोबार और चुनौतियां
यह कंपनी स्पेशलिटी केमिकल्स सेक्टर में काम करती है और मुख्य रूप से सोडियम बाइसल्फाइट और अमोनियम बाइसल्फाइट जैसे सल्फर-बेस्ड केमिकल्स बनाती है। इनके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल फार्मा, फूड एंड बेवरेज और वॉटर ट्रीटमेंट इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर होता है। कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स गुजरात के वटवा और बावला में स्थित हैं।
हालाँकि लिस्टिंग के दिन का प्रदर्शन शानदार रहा है, लेकिन निवेशकों को कंपनी के लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल हेल्थ पर ध्यान देना होगा:
- कर्ज का बोझ: कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो लगभग 98% है, जो काफी अधिक है। भारी कर्ज के कारण प्रॉफिट का एक बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में चला जाता है, जो कंपनी की वित्तीय लचीलेपन (Financial Flexibility) को प्रभावित कर सकता है।
- एक्सपोर्ट रिस्क: कंपनी का 30% से 50% रेवेन्यू इंटरनेशनल मार्केट्स से आता है। ऐसे में ग्लोबल डिमांड में बदलाव और करेंसी उतार-चढ़ाव कंपनी के मुनाफे पर सीधा असर डाल सकते हैं।
- कच्चे माल की लागत: सल्फर जैसे रॉ मटेरियल की कीमतों में होने वाली हलचल कंपनी के मार्जिन पर दबाव बना सकती है। अगर कंपनी बढ़ती लागत को ग्राहकों पर नहीं डाल पाती है, तो मुनाफा प्रभावित होना तय है।
इसके अलावा, गवर्नेंस के मोर्चे पर भी निवेशकों की नजरें कंपनी के बोर्ड पर टिकी रहेंगी, क्योंकि फिलहाल बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की संख्या कम है।
