सचिन बंसल की फिनटेक कंपनी Navi ने ₹3,000 करोड़ जुटाने के लिए अपना IPO प्रोसेस फिर से शुरू कर दिया है। कंपनी का लक्ष्य $2 बिलियन वैल्यूएशन हासिल करना है। 2022 में पिछला प्रयास स्थगित करने के बाद, Navi ने बैंकिंग सिंडिकेट नियुक्त किया है और दिसंबर 2026 तक प्रॉस्पेक्टस फाइल करने की योजना बना रही है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब कंपनी हालिया वित्तीय वर्ष में वापस घाटे में चली गई है।
Navi का ₹3,000 करोड़ IPO का दूसरा प्रयास
पूर्व फ्लिपकार्ट एग्जीक्यूटिव सचिन बंसल द्वारा सह-स्थापित फिनटेक फर्म Navi, अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) प्लान को फिर से शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। कंपनी का लक्ष्य लगभग ₹3,000 करोड़ (लगभग $315 मिलियन) फ्रेश इश्यू ऑफ शेयर्स के जरिए जुटाना है, और इसके लिए $2 बिलियन तक के वैल्यूएशन का लक्ष्य रखा गया है।
पिछली बार क्यों टला था IPO?
यह कंपनी के लिए पब्लिक मार्केट में कदम रखने का दूसरा प्रयास है। मार्च 2022 में, Navi ने अपना ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस फाइल किया था और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से आवश्यक नियामक मंजूरी भी प्राप्त कर ली थी। हालांकि, उस समय कंपनी ने बाजार की कमजोर धारणा और व्यापक आर्थिक अनिश्चितता का हवाला देते हुए लिस्टिंग के साथ आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया था। इस नए प्रयास को संभालने के लिए, Navi ने कथित तौर पर JM Financial Ltd., Kotak Mahindra Capital Co., Goldman Sachs Group Inc., और JPMorgan Chase & Co. जैसे बैंकरों की एक सिंडिकेट को सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है। कंपनी वर्तमान में दिसंबर 2026 तक एक औपचारिक प्रॉस्पेक्टस फाइल करने का लक्ष्य बना रही है, हालांकि समय-सीमा और अंतिम डील का आकार बाजार की स्थितियों के अधीन रहेगा।
वित्तीय स्थिति में बदलाव
Navi विभिन्न वित्तीय सेगमेंट में काम करती है, जिसमें लेंडिंग, म्यूचुअल फंड, हेल्थ इंश्योरेंस और यूपीआई पेमेंट शामिल हैं। जहां कंपनी ने इन वर्टिकल्स को बढ़ाने में महत्वाकांक्षा दिखाई है, वहीं हाल के वित्तीय वर्ष में इसकी वित्तीय सेहत में उतार-चढ़ाव देखा गया है। वित्तीय वर्ष 2024 में मुनाफा दर्ज करने के बाद, कंपनी वित्तीय वर्ष 2025 में ₹126 करोड़ के घाटे में चली गई। संभावित निवेशकों के लिए, यह बदलाव प्रतिस्पर्धी भारतीय फिनटेक स्पेस में लगातार लाभप्रदता के साथ तेजी से विकास को संतुलित करने की चुनौतियों को उजागर करता है।
मार्केट का माहौल और रिस्क
Navi का पब्लिक होने का प्रयास ऐसे समय में आया है जब भारत में वित्तीय सेवा फर्मों के बीच काफी हलचल है, और लेंडिंग व फिनटेक सेक्टर की कई कंपनियां लिस्टिंग की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, पब्लिक ऑफरिंग का रास्ता विशिष्ट जोखिमों से भरा है, जिनकी निवेशक आम तौर पर बारीकी से जांच करते हैं। Navi के लिए एक मुख्य चिंता का विषय इसका बिजनेस मॉडल है, जो ऐतिहासिक रूप से असुरक्षित लेंडिंग (बिना किसी कोलैटरल के दिए गए लोन) पर बहुत अधिक निर्भर रहा है। जबकि कंपनी सुरक्षित लोन उत्पादों में विविधता लाने पर काम कर रही है, उसका लेंडिंग पोर्टफोलियो क्रेडिट साइकिल और कर्जदारों के पुनर्भुगतान व्यवहार के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।
इसके अलावा, भारतीय फिनटेक सेक्टर सख्त नियामक माहौल के तहत काम करता है। डिजिटल लेंडिंग, डेटा प्राइवेसी या पूंजी आवश्यकताओं से संबंधित नियमों में बदलाव सीधे परिचालन लागत और विकास की रणनीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। कंपनी की विस्तार योजनाओं को लागू करने और अपने बॉटम लाइन को प्रबंधित करने की क्षमता बाजार के लिए एक प्रमुख फोकस क्षेत्र होगी। निवेशक संभवतः इस बात पर स्पष्टता चाहेंगे कि कंपनी लगातार लाभप्रदता में कैसे लौटना चाहती है और वह डिजिटल वित्तीय सेवा बाजार में प्रतिस्पर्धी दबावों का प्रबंधन कैसे करेगी।
