SML Ltd अगले **2 से 3 सालों** में शेयर बाजार में लिस्ट होने की योजना बना रही है। कंपनी अपने नए केमिकल प्रोडक्ट्स की रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) के लिए फंड जुटाने की तैयारी में है, जबकि फिलहाल कंपनी पूरी तरह कर्ज-मुक्त है।
आईपीओ की तैयारी
SML Ltd अगले 2 से 3 वर्षों के भीतर अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने की संभावना तलाश रही है। कंपनी का मुख्य फोकस सल्फर-आधारित फर्टिलाइजर्स से हटकर अब केमिकल इनोवेशन की ओर है। फिलहाल कोई आधिकारिक तारीख तय नहीं है, लेकिन अगले 12 से 24 महीनों के भीतर लिस्टिंग की रूपरेखा साफ हो जाएगी।
R&D और वित्तीय स्थिति
केमिकल इंडस्ट्री में इनोवेशन काफी खर्चीला होता है। एक नए केमिकल प्रोडक्ट को विकसित करने का खर्च $7 करोड़ से $8 करोड़ तक हो सकता है। हालांकि कंपनी अब तक खुद की कमाई से काम चला रही थी, लेकिन बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए अब उन्हें बाहरी फंड की जरूरत है। अच्छी बात यह है कि कंपनी के पास ₹450 करोड़ से ₹470 करोड़ की कैश रिजर्व मौजूद है और यह लगभग कर्ज-मुक्त है।
बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
कंपनी का लक्ष्य फर्टिलाइजर सेगमेंट में अपनी हिस्सेदारी को मौजूदा 30% - 40% से बढ़ाकर 60% (2030 तक) करना है। इसके साथ ही कंपनी बायोलॉजिक्स और एडवांस्ड क्रॉप प्रोटेक्शन की ओर कदम बढ़ा रही है। कंपनी पाइपलाइन में 7 नए प्रोडक्ट्स पर काम कर रही है और 2028-29 फाइनेंशियल ईयर तक पूरी क्षमता (Capacity) पर काम करने का लक्ष्य रखा है।
बाजार की चुनौतियां और रिस्क
मौजूदा माहौल कंपनी के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण है। इसी वजह से कंपनी ने इस फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने रेवेन्यू टारगेट को ₹1,800 करोड़ से घटाकर ₹1,600 करोड़ कर दिया है। इसके पीछे मुख्य वजहें अनियमित मानसून, भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical tensions) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार शुल्क हैं। निवेशकों के लिए अब यह देखना जरूरी होगा कि कंपनी इन चुनौतियों के बीच अपने R&D और बिजनेस एक्सपेंशन को कैसे संभालती है।
