सेबी का बड़ा कदम: 2026 के लिए IPO की राह खुली
SEBI की तरफ से इन विविध क्षेत्रों की कंपनियों को मिली यह रेगुलेटरी हरी झंडी 2026 में आईपीओ बाजार के लिए एक मजबूत संकेत है। यह दिखाता है कि सेबी अलग-अलग इंडस्ट्रीज के लिए मार्केट में एंट्री की राह आसान कर रहा है।
किस कंपनी को मिली इजाजत और क्या है प्लान?
HD Fire Protect: महाराष्ट्र की यह फायर प्रोटेक्शन इक्विपमेंट निर्माता कंपनी पूरी तरह से ऑफर-फॉर-सेल (OFS) आईपीओ लाएगी, जिसका मतलब है कि पैसा मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगा।
Parijat Industries (India): दिल्ली की यह एग्रोकेमिकल कंपनी एक मिक्स्ड इश्यू लाने की तैयारी में है। इसमें ₹160 करोड़ की फ्रेश कैपिटल और OFS दोनों शामिल होंगे, जिसका इस्तेमाल डेट रिपेमेंट के लिए किया जाएगा।
Xtranet Technologies: आईटी सॉल्यूशंस प्रोवाइडर कंपनी ₹190 करोड़ फ्रेश इश्यू से जुटाना चाहती है, जिसका उपयोग डेट रिडक्शन, वर्किंग कैपिटल और अन्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए होगा।
Rotomag Enertec: गुजरात की यह कंपनी, जो डीसी मोटर्स और सोलर इन्वर्टर बनाती है, फ्रेश इश्यू और OFS के कॉम्बिनेशन से फंड जुटाएगी। इसका इस्तेमाल भी डेट रिडेम्पशन और वर्किंग कैपिटल के लिए होगा।
इसके अलावा, GovTech सॉल्यूशंस प्रोवाइडर CSM Technologies और रियल एस्टेट डेवलपर Eldeco Infrastructure and Properties को भी ₹1,000 करोड़ के बड़े इश्यू के लिए सेबी की मंजूरी मिल गई है। AITMC Ventures ने भी कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग रूट से क्लीयरेंस हासिल की है।
जब एक कंपनी ने वापस लिए कदम
जहां एक ओर कई कंपनियों को सेबी की मंजूरी मिली है, वहीं दूसरी ओर, पावर ट्रांसमिशन के लिए लैटिस स्ट्रक्चर बनाने वाली कंपनी Associated Power Structures ने 30 जनवरी को अपने आईपीओ पेपर्स वापस ले लिए। यह दिखाता है कि हर कंपनी का मार्केट में आने का प्लान सफल नहीं होता।
2026 में प्राइमरी मार्केट का कैसा रहेगा हाल?
एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि 2026 भारतीय प्राइमरी मार्केट के लिए कैपिटल रेजिंग के मामले में रिकॉर्ड तोड़ साल साबित हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ₹3.5 से ₹4 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। इस तेजी के पीछे मैच्योर बिजनेस, बेहतर गवर्नेंस और मजबूत प्रॉफिटेबिलिटी वाले कंपनियों पर फोकस रहने की उम्मीद है। आईटी सर्विसेज और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर खास तौर पर इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभा सकते हैं। सेबी का कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग रूट जैसी नई पहलों से भी यह प्रक्रिया आसान हो रही है। हालांकि, Associated Power Structures जैसे उदाहरण यह भी याद दिलाते हैं कि मार्केट में एंट्री के लिए कंपनियों को सख्त ड्यू डिलिजेंस से गुजरना पड़ता है।