SBI Funds Management अपना ₹13,500 करोड़ का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 14 जुलाई से लाने की तैयारी में है। यह ऑफर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और Amundi द्वारा पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) के तौर पर लाया जा रहा है, जिससे कंपनी का वैल्युएशन ₹1.5 लाख करोड़ तक जा सकता है।
SBI Funds Management का IPO जल्द
SBI Funds Management, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का एसेट मैनेजमेंट डिविजन है, ने 14 जुलाई 2026 को अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की तैयारी कर ली है। यह पूरा ऑफर सेल के लिए ही होगा, जिसका मतलब है कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे और कंपनी को इससे कोई पैसा नहीं मिलेगा। शेयर की कीमत का बैंड 9 जुलाई 2026 को जारी होने की उम्मीद है।
शेयरधारकों की योजना और वैल्युएशन
इस IPO में कंपनी के दो मुख्य प्रमोटर मिलकर अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। SBI, जो अभी एसेट मैनेजर का 63% हिस्सा रखती है, अपना 6.3% स्टेक बेचने का इरादा रखती है। वहीं, यूरोपीय पार्टनर Amundi, जिसके पास 37% शेयर हैं, 3.7% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। बाजार के अनुमानों के मुताबिक, कंपनी ₹1.3 लाख करोड़ से ₹1.5 लाख करोड़ के बीच वैल्युएशन चाह रही है। यह IPO भारत में सबसे बड़े फाइनेंशियल सर्विसेज लिस्टिंग में से एक होगा।
बिजनेस की स्थिति और सेक्टर में पोजीशन
नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, SBI Funds Management ₹28 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति का प्रबंधन करती है। भारतीय म्यूचुअल फंड बाजार में, इसकी हिस्सेदारी 15% से अधिक है। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के विपरीत, जिन्हें लगातार भारी निवेश की आवश्यकता होती है, यह कंपनी फी-बेस्ड बिजनेस मॉडल पर काम करती है। इसका मतलब है कि इसका रेवेन्यू मुख्य रूप से इसके प्रबंधन के तहत संपत्ति के कुल मूल्य से जुड़ा हुआ है।
वित्तीय और रणनीतिक विचार
निवेशकों को यह ध्यान देना चाहिए कि यह एक ऑफर फॉर सेल है, जो आमतौर पर मौजूदा निवेशकों को बाहर निकलने का मौका देने या नियामक शेयरधारिता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए होता है, न कि नए बिजनेस विस्तार के लिए। कंपनी टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश कर रही है ताकि सर्विस एफिशिएंसी को बढ़ाया जा सके।
इस लिस्टिंग के साथ, SBI Funds Management, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अन्य सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध सहायक कंपनियों जैसे SBI Life Insurance और SBI Cards & Payment Services के साथ जुड़ जाएगी। जबकि भारत में एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में लगातार वृद्धि देखी गई है, यह इक्विटी मार्केट की अस्थिरता और ब्याज दर चक्रों के प्रति भी संवेदनशील है। बोली लगने के लिए IPO खुलने के बाद, संभावित निवेशकों के लिए अगली महत्वपूर्ण जानकारी मूल्य बैंड और सब्सक्रिप्शन डेटा होगी।
