फर्नीचर और अप्लायंस रेंटल कंपनी Rentomojo अपना IPO लेकर आ रही है। **₹1,255.57 करोड़** के इस इश्यू के लिए सब्सक्रिप्शन **9 सितंबर** से **11 सितंबर, 2026** तक खुला रहेगा।
Rentomojo ने प्राइमरी मार्केट में एंट्री करने की तैयारी पूरी कर ली है। कंपनी का IPO ₹1,255.57 करोड़ का है, जिसमें ₹150 करोड़ के फ्रेश शेयर जारी किए जाएंगे। बाकी ₹1,105.57 करोड़ का हिस्सा ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए आएगा, जहां मौजूदा प्रमोटर्स और शेयरहोल्डर्स अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।
मुनाफे के पीछे का सच
FY26 में कंपनी ने ₹387 करोड़ का रेवेन्यू और ₹104.3 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। लेकिन निवेशकों को यह समझना होगा कि इस प्रॉफिट में ₹36.6 करोड़ का एक 'वन-टाइम' डेफ़र्ड टैक्स क्रेडिट शामिल है। अगर इस गैर-आवर्ती लाभ को हटा दिया जाए, तो कंपनी का वास्तविक ऑपरेटिंग प्रॉफिट काफी कम है। किसी भी फैसले से पहले इन वन-टाइम गेन्स को हटाकर कंपनी की असली कमाई का आकलन करना बहुत जरूरी है।
बिजनेस मॉडल और चुनौतियां
Rentomojo का मॉडल 'कैपिटल-इंटेंसिव' है। इसका मतलब है कि नए सब्सक्राइबर्स जोड़ने के लिए कंपनी को बड़ी मात्रा में फिजिकल एसेट्स (फर्नीचर, अप्लायंसेज) खरीदने पड़ते हैं। इस बिजनेस में वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और एसेट रिफर्बिशमेंट का खर्चा काफी ज्यादा होता है। कंपनी को लगातार नई ग्रोथ के लिए भारी पूंजी की जरूरत पड़ती है, जो कैश फ्लो पर दबाव बना सकती है।
कॉम्पिटिशन और रिस्क
बाजार में कंपनी का मुकाबला Furlenco और Cityfurnish जैसे प्लेयर्स से है। रेंटल सेक्टर में ग्रोथ पूरी तरह से शहरी आबादी की डिमांड पर टिकी है। यदि कंपनी अपने एसेट्स के रिफर्बिशमेंट खर्चों को काबू में नहीं रख पाती या ऑक्यूपेंसी रेट गिरता है, तो मार्जिन पर बुरा असर पड़ सकता है। निवेशकों को कंपनी की डेट मैनेजमेंट क्षमता और टैक्स बेनिफिट्स के बिना मुनाफे कमाने की काबिलियत पर नजर रखनी चाहिए।
