Rays of Belief Ltd. के शेयर आज शेयर बाजार में फ्लैट लिस्ट हुए हैं। 107 गुना सब्सक्राइब होने के बाद निवेशकों को बंपर लिस्टिंग गेन की उम्मीद थी, लेकिन शेयर अपने ₹239 के इश्यू प्राइस पर ही खुले, जिससे बाजार में मायूसी है।
लिस्टिंग की हकीकत और उम्मीदों का अंतर
मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को Rays of Belief Ltd. (ब्रांड नाम: 'Mom's Belief') के शेयर बाजार में उतरे। निवेशकों को उम्मीद थी कि ग्रे मार्केट की हलचल के बाद शेयर में तेजी देखने को मिलेगी, लेकिन शेयर ₹239 के इश्यू प्राइस पर ही लिस्ट हो गए। यह सुस्त शुरुआत उन निवेशकों के लिए बड़ा झटका है जिन्होंने IPO में जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई थी।
IPO का गणित और उत्साह
IPO के दौरान निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया था। आंकड़ों पर गौर करें तो नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स का कोटा 279.11 गुना और रिटेल इन्वेस्टर्स का कोटा 195.86 गुना भरा था। वहीं, QIB सेगमेंट में भी 9.06 गुना सब्सक्रिप्शन देखा गया था। इतनी भारी डिमांड के बाद भी लिस्टिंग गेन न मिल पाना, बाजार की बदलती नब्ज और ग्रे मार्केट के दावों के बीच के अंतर को साफ दर्शाता है।
कारोबार और आगे का रोडमैप
यह कंपनी न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों के उपचार (Intervention) के क्षेत्र में काम करती है और भारत के 57 शहरों में 136 सेंटर्स के साथ अमेरिका में भी मौजूद है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी का टोटल रेवेन्यू ₹82.06 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट ₹4.96 करोड़ दर्ज किया गया।
IPO से जुटाए गए ₹125 करोड़ का इस्तेमाल कंपनी अपने विस्तार के लिए करेगी। इसमें से ₹41.36 करोड़ नए सेंटर खोलने पर, ₹14.45 करोड़ लीज रिन्यूअल पर, और ₹10.13 करोड़ अमेरिकी सब्सिडियरी की लाइसेंसिंग जरूरतों पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा ₹10.20 करोड़ ब्रांडिंग पर खर्च करने की योजना है।
वैल्यूएशन का गणित और जोखिम
लॉन्ग टर्म निवेश करने से पहले निवेशकों को कंपनी के वैल्यूएशन पर ध्यान देना चाहिए। कंपनी का P/E रेशियो 100x से अधिक है, जो इसे काफी महंगा बनाता है। इसके अलावा, कंपनी का बिजनेस मॉडल काफी हद तक कुशल थेरेपिस्ट्स पर निर्भर है, जिससे वेज इन्फ्लेशन (Wage Inflation) बढ़ने पर मुनाफे पर दबाव आ सकता है। चूंकि कंपनी अभी तेजी से विस्तार कर रही है, इसलिए एग्जीक्यूशन रिस्क और मुनाफे के छोटे ट्रैक रिकॉर्ड को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है।
