Rays of Belief का IPO **5.09 गुना** सब्सक्राइब होकर बंद हो गया है। 'Mom's Belief' ब्रांड के तहत काम करने वाली इस कंपनी को रिटेल निवेशकों से जबरदस्त प्यार मिला है। कंपनी अब इन पैसों से अपने क्लिनिक का विस्तार करेगी, हालांकि निवेशकों को कंपनी के निगेटिव कैश फ्लो और विदेशों पर निर्भरता जैसे रिस्क पर भी ध्यान देना होगा।
सब्सक्राइबर्स का उत्साह
3 सितंबर, 2026 को Rays of Belief का IPO क्लोज हुआ, जिसे निवेशकों ने हाथों-हाथ लिया। कुल 5.09 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ, निवेशकों ने करीब 1.59 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाईं, जबकि ऑफर में केवल 31.37 लाख शेयर ही उपलब्ध थे। रिटेल निवेशकों का उत्साह सबसे ज्यादा रहा, जिनका हिस्सा 23.21 गुना भरा, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने 4.86 गुना आवेदन किया।
बिजनेस मॉडल और विस्तार का प्लान
'Mom's Belief' ब्रांड के तहत यह कंपनी न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर (NDD) इंटरवेंशन सेवाएं देती है। कंपनी इस ₹125 करोड़ के फ्रेश इश्यू का इस्तेमाल अपने फिजिकल नेटवर्क को बढ़ाने के लिए करेगी। मैनेजमेंट का लक्ष्य हर साल लगभग 100 नए क्लिनिक खोलने का है। यह 100% फ्रेश इश्यू है, यानी जुटाया गया पूरा पैसा कंपनी के विकास में ही लगेगा।
रिस्क और फाइनेंशियल सेहत
वित्तीय वर्ष 2026 में कंपनी का रेवेन्यू ₹81.66 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹4.96 करोड़ रहा। हालांकि, कुछ चुनौतियां चिंता का विषय हैं। कंपनी का एक बड़ा हिस्सा मुनाफे का केवल 3 अमेरिका स्थित क्लिनिकों से कमा रही है, जो भौगोलिक रिस्क को बढ़ाता है।
इसके अलावा, FY2026 में कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो 'निगेटिव' रहा है, जिसका मतलब है कि बिजनेस डेली ऑपरेशंस में पैसा कमा नहीं रहा, बल्कि खर्च कर रहा है। सालाना 100 क्लिनिक खोलने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य इसे एक कठिन चुनौती (Execution Risk) के दायरे में खड़ा करता है। इसके अतिरिक्त, सिंगापुर और अमेरिका में प्रमोटर्स से जुड़ी कंपनियों के साथ फाइनेंशियल डीलिंग्स भी निवेशकों के लिए जांच का विषय है।
आगे की राह
फिलहाल, स्टॉक का P/E मल्टीपल इसकी वर्तमान स्थिति के हिसाब से काफी ज्यादा है। अलॉटमेंट 4 सितंबर, 2026 तक फाइनल होने की उम्मीद है। सब कुछ ठीक रहा तो 8 सितंबर, 2026 को BSE और NSE पर शेयरों की लिस्टिंग होगी।
