Rays of Belief का IPO जबरदस्त रिस्पांस के साथ बंद हुआ है। रिटेल और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की भारी मांग के चलते यह इश्यू **107.71 गुना** सब्सक्राइब हुआ है। कंपनी **₹125 करोड़** का फ्रेश इश्यू लेकर आई थी, जिसकी लिस्टिंग **8 सितंबर 2026** को होनी है।
भारी सब्सक्रिप्शन, फिर भी सतर्क हैं एक्सपर्ट्स
3 सितंबर 2026 को बंद हुए Rays of Belief Limited के IPO को निवेशकों का जबरदस्त साथ मिला। कंपनी अपने 'Mom's Belief' ब्रांड के जरिए न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर इंटरवेंशन के क्षेत्र में काम करती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) का कोटा 279.11 गुना और रिटेल निवेशकों का कोटा 195.86 गुना भरा है। वहीं, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) ने भी अंत में रुचि दिखाई और उनका कोटा 9.06 गुना सब्सक्राइब हुआ। कंपनी ने शेयरों का प्राइस बैंड ₹227 से ₹239 तय किया था।
फंड का इस्तेमाल और लिस्टिंग
IPO से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल कंपनी अपने थेरेपी सेंटर्स के विस्तार, लीज ऑब्लिगेशन्स और अमेरिका स्थित अपनी सब्सिडियरी को कैपिटल सपोर्ट देने के लिए करेगी। अब निवेशकों की नजरें 8 सितंबर 2026 को होने वाली लिस्टिंग पर टिकी हैं।
रिस्क फैक्टर और वित्तीय स्थिति
तेजी के बावजूद मार्केट एक्सपर्ट्स कुछ अहम पहलुओं को लेकर सतर्क हैं। कंपनी की वैल्यूएशन 100 के P/E रेशियो के आसपास है, जिसे प्रॉफिट के मुकाबले काफी महंगा माना जा रहा है।
- प्रॉफिट: फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी का नेट प्रॉफिट घटकर ₹4.96 करोड़ रह गया है, जो पिछले साल ₹5.88 करोड़ था।
- ROE (Return on Equity): यह आंकड़ा पिछले साल के 56.56% से गिरकर 21.64% पर आ गया है, जो कंपनी की पूंजी पर रिटर्न जनरेट करने की क्षमता में कमी को दिखाता है।
कंपनी का बिजनेस मॉडल फिजिकल सेंटर्स के तेजी से विस्तार पर टिका है, जिसमें एग्जीक्यूशन रिस्क और मार्जिन पर दबाव का खतरा हमेशा बना रहता है। अब देखना यह होगा कि बाजार कंपनी की लिस्टिंग के बाद इसे किस तरह की वैल्यू देता है।
