Quest Global IPO: भारत में ₹8,300 करोड़ का मेगा इश्यू, सिंगापुर से बेंगलुरु होगा हेडक्वार्टर शिफ्ट!

IPO
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Quest Global IPO: भारत में ₹8,300 करोड़ का मेगा इश्यू, सिंगापुर से बेंगलुरु होगा हेडक्वार्टर शिफ्ट!

इंजीनियरिंग सर्विसेज कंपनी Quest Global भारतीय बाजार में **$1 बिलियन (लगभग ₹8,300 करोड़)** का IPO लाने की तैयारी में है। इसके साथ ही कंपनी अपना हेडक्वार्टर सिंगापुर से बेंगलुरु शिफ्ट कर रही है, जिसे 'रिवर्स फ्लिप' कहा जा रहा है।

हेडक्वार्टर शिफ्ट और IPO की तैयारी

ग्लोबल इंजीनियरिंग सर्विसेज फर्म Quest Global भारतीय शेयर बाजार में $1 बिलियन (लगभग ₹8,300 करोड़) का अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने की योजना बना रही है। यह कंपनी की एक बड़ी स्ट्रैटेजिक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपना आधिकारिक हेडक्वार्टर सिंगापुर से भारत के बेंगलुरु में शिफ्ट कर रही है। इस प्रक्रिया को 'रिवर्स फ्लिप' कहा जाता है और यह भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टिंग की सुविधा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

IPO प्रोसेस और टाइमलाइन

खबरों के अनुसार, कंपनी ने IPO प्रक्रिया को संभालने के लिए वित्तीय संस्थानों के एक सिंडिकेट से बातचीत शुरू कर दी है। हालांकि, शेयर बिक्री की सटीक टाइमिंग अभी तय नहीं हुई है, लेकिन इस प्रक्रिया में कॉरपोरेट डोमिसाइल को शिफ्ट करना शामिल है, जो एक जटिल कानूनी और रेगुलेटरी कार्य है। अगस्त 2026 के मध्य तक, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के पास कोई ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस फाइल नहीं किया गया है।

Quest Global का बिजनेस और वैल्यूएशन

Quest Global इंजीनियरिंग, रिसर्च और डेवलपमेंट (ER&D) सेक्टर में काम करती है। यह एयरोस्पेस, डिफेंस, ऑटोमोटिव, एनर्जी और सेमीकंडक्टर जैसे उद्योगों को विशेष सेवाएं प्रदान करती है। 18 देशों में 21,500 से अधिक कर्मचारियों के साथ, कंपनी आउटसोर्स्ड टेक्निकल सर्विसेज में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित हुई है। फरवरी 2026 में हिलहाउस इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट से कैपिटल इन्फ्यूजन के बाद, कंपनी का वैल्यूएशन लगभग $4.5 बिलियन आंका गया था।

शेयरहोल्डिंग और IPO से उम्मीदें

कंपनी की शेयरहोल्डिंग संरचना में इसके सह-संस्थापक अजित प्रभु की 42% हिस्सेदारी है, जबकि कार्लाइल ग्रुप के पास 24% की माइनॉरिटी हिस्सेदारी है। निवेशकों को इस बात की जानकारी मिलने की उम्मीद है कि लक्षित $1 बिलियन में से कितना नया शेयर जारी करके उठाया जाएगा और कितना मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी बेचकर। आमतौर पर, नए शेयर बिजनेस विस्तार या कर्ज कम करने के लिए जारी किए जाते हैं, जबकि सेकेंडरी शेयर बिक्री से शुरुआती निवेशक बाहर निकल सकते हैं।

मुख्य जोखिम और आगे की राह

इस IPO को लेकर सबसे बड़ी चिंता 'रिवर्स फ्लिप' के निष्पादन को लेकर है। सिंगापुर से भारत में कंपनी का बेस ट्रांजिशन करने के लिए रेगुलेटरी और कानूनी आवश्यकताएं समय लेने वाली हो सकती हैं और इसमें टैक्स और अनुपालन संबंधी विचार शामिल हैं। इस प्रक्रिया में देरी से IPO की अपेक्षित समय-सीमा प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, कंपनी का प्रदर्शन उन उद्योगों की वैश्विक मांग से जुड़ा हुआ है जिनकी वह सेवा करती है। वैश्विक ग्राहकों द्वारा एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव या सेमीकंडक्टर खर्चों में मंदी कंपनी की विकास संभावनाओं और IPO के बाजार में स्वागत को प्रभावित कर सकती है।

निवेशकों के लिए अगला प्रमुख मील का पत्थर SEBI के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) का औपचारिक फाइलिंग होगा। यह दस्तावेज कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य, IPOProceeds के विशिष्ट उपयोग और पुनर्गठन समय-सीमा पर और अधिक स्पष्टता प्रदान करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.