इंजीनियरिंग सर्विसेज फर्म Quest Global ने अपना ठिकाना सिंगापुर से भारत शिफ्ट कर लिया है। कंपनी बड़े पब्लिक इश्यू (IPO) की तैयारी में है और इसके लिए इनवेस्टमेंट बैंकों को भी नियुक्त कर लिया गया है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे इसे लिस्टेड 'Quest Capital Markets' से न जोड़ें क्योंकि दोनों अलग कंपनियां हैं।
भारत में बड़ा बदलाव (Reverse Flip)
इंजीनियरिंग फर्म Quest Global ने अपनी कॉरपोरेट डोमिसाइल को सिंगापुर से भारत शिफ्ट कर एक बड़ा फैसला लिया है। इस प्रक्रिया को 'रिवर्स फ्लिप' कहा जा रहा है, जिसमें विदेशी होल्डिंग एंटिटीज को भारतीय सब्सिडियरी के साथ मिला दिया गया है। कंपनी का मकसद बेंगलुरु को अपना मुख्य ऑपरेशनल और लीगल बेस बनाना है, ताकि भारत में लगभग $1 बिलियन का IPO लाया जा सके।
बड़े बैंकों की एंट्री
इस IPO प्रोसेस को मैनेज करने के लिए कंपनी ने इनवेस्टमेंट बैंकों का एक मजबूत सिंडिकेट तैयार किया है। इसमें Axis Capital, Kotak Mahindra Capital, JM Financial, Morgan Stanley और Citigroup जैसे बड़े नाम शामिल हैं। अब बाजार की नजरें कंपनी द्वारा रेगुलेटर के पास फाइल किए जाने वाले ड्राफ्ट प्रोस्पेक्टस पर टिकी हैं।
रेवेन्यू का गणित
कंपनी का रेवेन्यू मॉडल अभी भी काफी हद तक पश्चिमी देशों पर निर्भर है। कुल कमाई का 50% हिस्सा अमेरिका से और 30% यूरोप से आता है, जबकि भारत का योगदान अभी सिंगल डिजिट में ही है। इस गैप को भरने के लिए कंपनी अधिग्रहण (Acquisition) पर जोर दे रही है, जैसे कि अप्रैल 2026 में सेमीकंडक्टर डिजाइन कंपनी BITSILICA को खरीदना। कंपनी को उम्मीद है कि ये अधिग्रहण आने वाले समय में 5% से 10% तक की ग्रोथ देंगे।
भ्रम से बचें
भारतीय निवेशकों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि 'Quest Global' और लिस्टेड एनबीएफसी 'Quest Capital Markets' का आपस में कोई लेना-देना नहीं है। Quest Global एक प्राइवेट फर्म है जिसे The Carlyle Group और CEO Ajit Prabhu का समर्थन हासिल है।
आगे क्या?
निवेशकों को अब कंपनी द्वारा रेगुलेटर के पास ड्राफ्ट पेपर फाइल करने का इंतजार करना चाहिए। इससे कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन, कर्ज और फंड के इस्तेमाल से जुड़ी पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।
