Prasol Chemicals की शेयर बाजार में शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। कंपनी का शेयर अपने ₹676 के इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 10% नीचे लिस्ट हुआ है।
बुधवार को शेयर बाजार में Prasol Chemicals की एंट्री उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। कंपनी का शेयर BSE पर ₹611 और NSE पर ₹610 के स्तर पर खुला, जो इसके ₹676 के ऑफर प्राइस से लगभग 10% कम है। इस सुस्त शुरुआत ने स्पेशलिटी केमिकल्स सेक्टर के प्रति निवेशकों की घटती दिलचस्पी को साफ जाहिर कर दिया है।
IPO का गणित और रिस्पॉन्स
कंपनी के ₹500 करोड़ के IPO को निवेशकों से कोई खास समर्थन नहीं मिला था। पूरे इश्यू को महज 3.3 गुना सब्सक्राइब किया गया। हालांकि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) ने 7.22 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ कुछ भरोसा जरूर दिखाया, लेकिन रिटेल और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की तरफ से बहुत सीमित मांग देखी गई। एनालिस्ट्स पहले ही इसकी महंगी वैल्युएशन पर सवाल उठा चुके थे, जो कि FY2026 की अर्निंग्स के मुकाबले 47 गुना के करीब थी।
कर्ज कम करने की चुनौती
Prasol Chemicals मुख्य रूप से एसीटोन और फॉस्फोरस-बेस्ड डेरिवेटिव्स बनाती है। कंपनी का इरादा IPO से जुटाई गई राशि में से ₹60 करोड़ का इस्तेमाल HDFC Bank और Kotak Mahindra Bank का कर्ज चुकाने में करने का है। हालांकि कर्ज कम करना एक अच्छा संकेत माना जाता है, लेकिन बाजार की नजर कंपनी के बिजनेस मॉडल और उसके वित्तीय इतिहास पर ज्यादा है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को कंपनी के कुछ प्रमुख जोखिमों को समझना होगा:
- कच्चे माल पर निर्भरता: कंपनी एसीटोन और येलो फॉस्फोरस जैसे कच्चे माल के आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है, जिससे ग्लोबल कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे मुनाफे पर पड़ता है।
- वित्तीय जोखिम: मार्च 2026 तक कंपनी की कंटिंजेंट लायबिलिटीज करीब ₹109 करोड़ रही हैं। साथ ही, ऑडिटर्स ने पहले भी इंटरनल कंट्रोल्स पर सवाल उठाए हैं।
- OFS का स्ट्रक्चर: कुल ₹500 करोड़ के IPO में ₹420 करोड़ का हिस्सा ऑफर फॉर सेल (OFS) था। इसका मतलब है कि पैसे का एक बड़ा हिस्सा कंपनी की ग्रोथ में न जाकर पुराने शेयरधारकों की जेब में गया।
आगे के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कंपनी अपने मार्जिन को स्थिर रख पाती है और कर्ज घटाने के वादे को किस तरह पूरा करती है।
