PRI के IPO पर विचार, Parent कंपनी पर वैश्विक दबाव
Pernod Ricard अपनी भारतीय सब्सिडियरी, Pernod Ricard India (PRI) के लिए Initial Public Offering (IPO) सहित विभिन्न स्ट्रेटेजिक ऑप्शंस पर विचार कर रही है। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब Parent कंपनी को वैश्विक स्तर पर कई वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में, Pernod Ricard ने 3.0% की ऑर्गेनिक सेल्स में गिरावट दर्ज की और S&P Global Ratings ने कंपनी के आउटलुक को घटाकर नेगेटिव कर दिया। वैश्विक कंपनी का नेट डेट/EBITDA रेश्यो FY25 में 3.3x था, जिसे 2029 तक 3.0x से नीचे लाने की योजना है। इसके उलट, PRI एक मजबूत ग्रोथ इंजन साबित हो रही है, जिसने FY2024-25 में ₹27,446 करोड़ का रेवेन्यू अर्जित किया है और पिछले पांच सालों में 8% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल की है। कंपनी कथित तौर पर गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) और सिरिल अमचंद मंगलदास (Cyril Amarchand Mangaldas) जैसी कंसल्टिंग फर्मों के साथ इस संभावित लिस्टिंग पर काम कर रही है, जो भारत के IPO बाजार में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
PRI: भारत की शराब इंडस्ट्री में सबसे आगे
Pernod Ricard India (PRI) वैल्यू के हिसाब से भारत के अल्कोहलिक बेवरेज मार्केट में टॉप पोजिशन पर है, और FY25 में इसने Diageo India (United Spirits) को भी पीछे छोड़ दिया है। भारत अब वॉल्यूम के हिसाब से Pernod Ricard का सबसे बड़ा मार्केट बन गया है, और वैल्यू के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा, जो चीन को भी पीछे छोड़ देता है। यह भारत के प्रीमियम उत्पादों की ओर बढ़ते झुकाव के कारण है। यह मार्केट Pernod Ricard के ग्लोबल रेवेन्यू का लगभग 12-13% योगदान देता है। बढ़ती आय और प्रीमियम उत्पादों की मांग के चलते भारतीय alco-bev मार्केट काफी बड़ा है और इसमें मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है। PRI के पोर्टफोलियो में Royal Stag, Blenders Pride जैसे ब्रांड्स के साथ-साथ Chivas Regal जैसे इम्पोर्टेड स्पिरिट्स भी शामिल हैं। हाल ही में Tilaknagar Industries को अपना Imperial Blue बिजनेस बेचने से PRI का फोकस प्रीमियम सेगमेंट पर और मजबूत हुआ है। कंपनी के CEO का लक्ष्य भारत में 'डबल-डिजिट' ग्रोथ हासिल करना है, जो इस मार्केट के रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।
IPO से PRI को मिल सकता है बेहतर वैल्यूएशन
PRI की एक अलग लिस्टिंग से शेयरहोल्डर्स की वैल्यू में काफी बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि Parent कंपनी की तुलना में वैल्यूएशन में बड़ा अंतर है। Pernod Ricard के ग्लोबल शेयर लगभग 11.8x-12.0x के प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो पर ट्रेड करते हैं। इसके मुकाबले, भारतीय कंपटीटर्स बहुत ऊंचे मल्टीपल्स पर कारोबार करते हैं: United Spirits 54.5x-56.4x पर, Radico Khaitan 81.8x-87.1x पर, और Tilaknagar Industries तो 93.9x से भी ऊपर के P/E पर ट्रेड कर रहा है। ये आंकड़े बताते हैं कि PRI एक इंडिपेंडेंट एंटिटी के तौर पर काफी बेहतर वैल्यूएशन हासिल कर सकता है। भारतीय alco-bev मार्केट की अनुमानित ग्रोथ, जो 2026-2032 के बीच 5.48% CAGR रहने की उम्मीद है, प्रमुख कंपनियों के लिए प्रीमियम वैल्यूएशन को और भी सपोर्ट करती है।
जोखिम: वैश्विक दबाव और भारतीय बाजार की चुनौतियाँ
PRI के मजबूत प्रदर्शन के बावजूद, वैश्विक Parent कंपनी कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। S&P Global Ratings ने मार्च 2026 में ऑपरेशनल स्लोडाउन (खासकर US और चीन जैसे प्रमुख बाजारों में) और इंडस्ट्री के कठिन माहौल का हवाला देते हुए नेगेटिव आउटलुक दिया था। Parent कंपनी के FY25 के ऑर्गेनिक नेट सेल्स में गिरावट आई है, और इसका नेट डेट/EBITDA रेश्यो अभी भी 3.3x पर है। CFO के पहले के बयानों से अलग हटकर deleveraging के लिए IPO पर विचार करना, वैश्विक वित्तीय रणनीति या पूंजी आवंटन में प्राथमिकताएं बदलने का संकेत हो सकता है। भारत में, PRI को कड़े नियमों और कड़ी प्रतिस्पर्धा वाले बाजार का सामना करना पड़ता है। स्थापित और उभरते हुए प्लेयर्स के बीच अपनी प्रीमियम-ईकरण (premiumization) की रणनीति को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए लगातार ऑपरेशनल एक्सीलेंस की आवश्यकता होगी। भारतीय यूनिट और Parent कंपनी के बीच वैल्यूएशन का बड़ा अंतर भी रणनीतिक टकराव पैदा कर सकता है, जिससे भारत की ग्रोथ की महत्वाकांक्षाएं और वैश्विक deleveraging की जरूरतें आपस में टकरा सकती हैं।
