फ्रेंच स्पिरिट्स दिग्गज Pernod Ricard SA ने अपनी भारतीय सब्सिडियरी के स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने की योजनाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया है। कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) Hélène de Tissot ने फरवरी 2026 में इस फैसले की पुष्टि की। अब कंपनी पब्लिक ऑफरिंग के जरिए तुरंत पैसा जुटाने के बजाय, अपनी ऑर्गेनिक ग्रोथ (organic growth) और आक्रामक तरीके से कर्ज घटाने पर जोर देगी।
Pernod Ricard India, ग्लोबल ग्रुप का एक अहम हिस्सा है और दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते अल्कोहल बाजारों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। 2023 के अंत और 2024 की शुरुआत से चल रही IPO की चर्चाओं पर अब विराम लग गया है। CFO Hélène de Tissot ने साफ किया है कि कंपनी की कर्ज घटाने की रणनीति के लिए भारतीय लिस्टिंग जरूरी नहीं है। कंपनी का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2029 तक नेट डेट-टू-EBITDA रेश्यो को 3x से नीचे लाना है, जबकि वर्तमान में यह फाइनेंशियल ईयर 2025 के अंत तक 3.3x पर है। यह फैसला दर्शाता है कि कर्ज घटाने और भारतीय बिजनेस की मजबूत ऑर्गेनिक ग्रोथ क्षमता का फायदा उठाने की जरूरत, डोमेस्टिक लिस्टिंग के फायदों से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
भारत का स्पिरिट्स मार्केट, जिसका अनुमान 2024 में $52.5 बिलियन था और 2028 तक $64 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, कंपनी के लिए ग्रोथ का बड़ा जरिया है। बढ़ती मिडिल क्लास, डिस्पोजेबल इनकम में वृद्धि और प्रीमियम व आर्टिसनल प्रोडक्ट्स की ओर ग्राहकों के झुकाव जैसे फैक्टर इस ग्रोथ को बढ़ावा दे रहे हैं। व्हिस्की खासकर 67% शेयर के साथ सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। Pernod Ricard India, फाइनेंशियल ईयर 2025 में वैल्यू के हिसाब से देश का टॉप अल्कोहलिक बेवरेज प्रोड्यूसर था, जिसकी सेल्स ₹27,446 करोड़ रही। कंपनी ने FY25 में अपने भारतीय ऑपरेशंस में 8% की ग्रोथ (Imperial Blue ब्रांड को छोड़कर) दर्ज की और आने वाले सालों में डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद कर रही है। यह विस्तार हर साल लगभग 2 करोड़ नए कानूनी उपभोक्ताओं के बाजार में आने और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मजबूत ट्रेंड के कारण संभव हो रहा है।
जहां Pernod Ricard SA को ग्लोबल सेल्स में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं इसके भारतीय सब्सिडियरी का प्रदर्शन शानदार है। कंपनी को उम्मीद है कि यूएस और चीन में कमजोर प्रदर्शन के कारण पूरे साल ऑर्गेनिक नेट सेल्स में 3-4% की गिरावट आ सकती है। लेकिन, फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही में भारत में 11% की नेट सेल्स ग्रोथ दर्ज की गई, जिसने ग्रुप के ओवरऑल नतीजों को काफी सहारा दिया। Pernod Ricard India अपनी प्रीमियम स्ट्रैटेजी और एफिशिएंसी पर फोकस कर रही है, जिससे यह भारत के जटिल रेगुलेटरी टैक्स और प्राइसिंग सिस्टम में भी मुनाफा कमा पा रही है। इसके प्रीमियम और सुपर-प्रीमियम ब्रांड्स, जैसे Jameson Irish Whiskey (जो अब भारत का टॉप इम्पोर्टेड स्पिरिट है), इस सफलता का नेतृत्व कर रहे हैं। वैल्यू के हिसाब से, Pernod Ricard India अपने प्रतिद्वंद्वियों जैसे Diageo India (United Spirits) जिसकी FY25 रेवेन्यू ₹27,276 करोड़ थी, और Radico Khaitan (लगभग ₹44,000 करोड़ वैल्यू वाली) से आगे है। पेरेंट कंपनी का ग्लोबल मार्केट कैप करीब $20 बिलियन है।
भारत में ग्रोथ की अपार संभावनाओं के बावजूद, Pernod Ricard India को कई जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। राज्य-वार अलग-अलग टैक्स और प्राइसिंग नियम कंपनी के लिए एक चुनौती बने हुए हैं। हाल ही में कंपनी पर इम्पोर्ट वैल्यूएशन को लेकर टैक्स विवाद और नई दिल्ली में रेगुलेटरी उल्लंघन के आरोप भी लगे थे, हालांकि कंपनी ने इससे इनकार किया है। ग्लोबल इकोनॉमिक माहौल भी चिंता का विषय बना हुआ है। Pernod Ricard SA ने हाल ही में अपने पूरे साल की सेल्स फोरकास्ट को घटाकर 3-4% की गिरावट कर दी है। यूएस में 12% और चीन में 7% की गिरावट के साथ-साथ ग्लोबल अनिश्चितताएं, भारतीय IPO मार्केट के धीमे होने की आशंकाओं के बीच, कंपनी के लिए फाइनेंशियल स्टेबिलिटी और ऑर्गेनिक विस्तार की जरूरत कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
Pernod Ricard की भारत में भविष्य की स्ट्रैटेजी पूरी तरह से ऑर्गेनिक ग्रोथ पर केंद्रित होगी, जो देश की प्रीमियमाइजेशन ट्रेंड और बढ़ते उपभोक्ता आधार का लाभ उठाएगी। भारत में IPO को रद्द करके, कंपनी अपनी ग्लोबल बैलेंस शीट को डी-लीवरेज करने और डिसिप्लिन्ड कैपिटल एलोकेशन अप्रोच अपनाने की अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत कर रही है। पेरेंट ग्रुप भले ही मौजूदा फाइनेंशियल ईयर (जून 2026 में समाप्त) में मॉडरेट सेल्स गिरावट की उम्मीद कर रहा हो, लेकिन भारत की Resilience और ग्रोथ पोटेंशियल, अन्य उभरते बाजारों के मजबूत प्रदर्शन के साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण संतुलन प्रदान करते हैं। कंपनी तत्काल पब्लिक मार्केट एग्जिट के बजाय, मार्केटिंग, इनोवेशन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के माध्यम से ब्रांड अपील को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगी ताकि लॉन्ग-टर्म वैल्यू बनाई जा सके।
