IPO Market: 30 सितंबर की डेडलाइन से पहले मचा हड़कंप, ₹45,000 करोड़ जुटाने की होड़

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AuthorMehul Desai|Published at:
IPO Market: 30 सितंबर की डेडलाइन से पहले मचा हड़कंप, ₹45,000 करोड़ जुटाने की होड़

30 सितंबर 2026 की रेगुलेटरी डेडलाइन के चलते करीब 30 कंपनियां अपने IPO लाने की जल्दी में हैं। ₹45,000 करोड़ के इस भारी-भरकम इश्यू पाइपलाइन में NSE का ₹30,000 करोड़ का IPO सबसे बड़ा आकर्षण है, जो बाजार की लिक्विडिटी को पूरी तरह सोख सकता है।

भारतीय प्राइमरी मार्केट में इस समय हलचल काफी तेज है। रेगुलेटर SEBI द्वारा दी गई ऑब्जर्वेशन लेटर्स की डेडलाइन 30 सितंबर 2026 नजदीक है। यदि कंपनियां इस तारीख तक अपना इश्यू लॉन्च नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें नए सिरे से ड्राफ्ट पेपर फाइल करने होंगे, जिसमें भारी लागत और समय बर्बाद होगा।

NSE का दबदबा और लिक्विडिटी का संकट

बाजार के जानकारों की नजरें खास तौर पर National Stock Exchange (NSE) के IPO पर टिकी हैं, जिसका साइज लगभग ₹30,000 करोड़ बताया जा रहा है। यह पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) है। इसके 18 सितंबर के आसपास खुलने की उम्मीद है। इतने बड़े इश्यू के आने से बाजार में उपलब्ध निवेश योग्य पूंजी पर गहरा असर पड़ सकता है, जिससे छोटी कंपनियों के लिए फंड जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

वैल्युएशन और निवेशकों के लिए रिस्क

मार्केट में इस समय बड़ी संख्या में इश्यू एक साथ आने से मर्चेंट बैंकर्स पर भी दबाव है। शेयर बाजार के ऊंचे स्तरों के बीच, कंपनियों के लिए सही वैल्युएशन तय करना मुश्किल हो रहा है। निवेशकों के लिए यह 'सेलेक्टिव' होने का समय है, क्योंकि हर कंपनी आकर्षक वैल्युएशन पर नहीं आ रही है। जो कंपनियां डेडलाइन से चूकेंगी, उन्हें रि-फाइलिंग के चक्कर में कानूनी और वित्तीय खर्चों का भी सामना करना पड़ेगा। अब देखना यह है कि सितंबर के मध्य में जब ये सभी IPO एक साथ टकराएंगे, तो मार्केट का रिस्पॉन्स कैसा रहता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.