मोतीलाल ओसवाल एएमसी के पूर्व अधिकारी निकेत शाह अब अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। उनकी कंपनी Compounding Asset Partners म्यूचुअल फंड लाइसेंस पाने के लिए **₹350 करोड़** की फंडिंग जुटा रही है, जिससे कंपनी की वैल्यूएशन **₹1,200 करोड़** तक पहुंचने का अनुमान है।
फंडिंग और वैल्यूएशन का गणित
पूर्व CIO निकेत शाह अपनी नई कंपनी Compounding Asset Partners के जरिए एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में बड़ी एंट्री की योजना बना रहे हैं। इस फंडिंग राउंड का मकसद कंपनी की नेटवर्थ को मजबूत करना है। कंपनी की योजना ₹1,200 करोड़ की पोस्ट-मनी वैल्यूएशन पर पूंजी जुटाने की है। यह पूरा फंड दो चरणों में लाया जाएगा, जिसमें पहले चरण में खुद निकेत शाह और अन्य दिग्गज कॉरपोरेट अधिकारियों का पैसा शामिल है।
SEBI के नए नियमों का फायदा
कंपनी म्यूचुअल फंड लाइसेंस हासिल करने के लिए SEBI के 'अल्टरनेटिव एलिजिबिलिटी फ्रेमवर्क' (Alternative Eligibility Framework) का सहारा ले रही है। इस रास्ते से उन कंपनियों को फायदा मिलता है जिनके पास अनुभवी मैनेजमेंट है, क्योंकि उन्हें 5 साल की प्रॉफिटेबिलिटी के पुराने नियम से छूट मिल जाती है। हालांकि, इसके लिए कंपनी को न्यूनतम ₹150 करोड़ की नेटवर्थ दिखाना अनिवार्य है।
बाजार में कड़ी चुनौती
निकेत शाह, जिन्होंने मोतीलाल ओसवाल में 14 साल बिताए हैं, अपने पुराने अनुभव के दम पर निवेशकों का भरोसा जीतने की कोशिश करेंगे। हालांकि, भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में पहले से ही दिग्गज कंपनियां मौजूद हैं, जिनका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बहुत गहरा है। ऐसे में नई कंपनी के सामने रेगुलेटरी मंजूरी और बाजार में अपनी जगह बनाने की चुनौती सबसे बड़ी होगी। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी कब तक अपना लाइसेंस हासिल कर पाती है और मार्केट में कब उतरती है।
