कंट्रोल पर घमासान: डील क्यों अटकी?
Naturals Salon और Reliance Industries के बीच प्रस्तावित स्टेक सेल को लेकर चल रही बातचीत, मालिकाना हक (ownership) के कंट्रोल के मुद्दे पर फंस गई है। Reliance ने 51% हिस्सेदारी की मांग रखी है, जिसका मतलब है कि वे कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहते हैं। वहीं, Naturals के को-फाउंडर C.K. कुमारवेल ने साफ किया है कि कंपनी तुरंत 49% से ज्यादा हिस्सेदारी बेचने को तैयार नहीं है। उनका मानना है कि इससे वे कुछ और वर्षों तक ऑपरेशनल कंट्रोल अपने पास बनाए रख सकते हैं। कुमारवेल ने कहा है कि Naturals को कोई जल्दी नहीं है और Reliance निश्चित रूप से वैल्यू ऐड करेगी, जिससे भविष्य में डील हो सकती है। फिलहाल, Naturals किसी और निवेशक से बातचीत नहीं कर रही है, यह दर्शाता है कि उनका पूरा ध्यान Reliance के साथ डील को सुलझाने पर है।
Reliance की ब्यूटी मार्केट में बड़ी चाल
Reliance Industries भारत के तेजी से बढ़ते ब्यूटी और पर्सनल केयर (BPC) सेक्टर में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। इसी कड़ी में उन्होंने अपना Omni-channel ब्यूटी प्लेटफॉर्म 'Tira' लॉन्च किया है। Naturals जैसे करीब 900 आउटलेट्स वाले एक स्थापित सैलून चेन में बड़ी हिस्सेदारी, Reliance को इस सेक्टर में तुरंत एक बड़ा फिजिकल फुटप्रिंट दे सकती है। यह उनके डिजिटल-फर्स्ट 'Tira' प्लेटफॉर्म को एक मजबूत ऑफलाइन सपोर्ट देगा। $214 बिलियन से अधिक के मार्केट कैप वाली Reliance के पास ऐसी रणनीतिक डील्स के लिए पर्याप्त वित्तीय क्षमता है। हालांकि, Reliance का P/E ratio लगभग 22-23 के आसपास है, जो बताता है कि निवेशक कंपनी की कमाई पर ज्यादा दांव लगा रहे हैं, इसलिए किसी भी अधिग्रहण को स्पष्ट रिटर्न दिखाना होगा।
भारत का चमकता ब्यूटी और सैलून बाजार
यह पूरी बातचीत भारत के विशाल और लगातार बढ़ते ब्यूटी और पर्सनल केयर (BPC) मार्केट के बैकड्रॉप में हो रही है। अनुमान है कि 2033 तक यह मार्केट $48 बिलियन तक पहुंच जाएगा। खासकर, ब्यूटी सैलून सेगमेंट की वैल्यू अभी $10 बिलियन से अधिक है और 2032-2033 तक यह $22 बिलियन से ऊपर जाने की उम्मीद है। इस ग्रोथ की वजह लोगों की बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम, शहरीकरण, ग्रूमिंग पर बढ़ता खर्च और महिलाओं की बढ़ती वर्किंग पॉपुलेशन है। प्रीमियम सर्विसेज की मांग भी बढ़ रही है। Naturals, जिसका फाइनेंशियल ईयर 2025 में ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) ₹450 करोड़ था और जो मौजूदा वर्ष में ₹600 करोड़ पहुंचने का अनुमान है, इस ट्रेंड का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है।
प्रतिस्पर्धा और IPO का विकल्प
Naturals भारत की सबसे बड़ी ऑर्गेनाइज्ड सैलून चेन्स में से एक है, लेकिन उसे Lakme Salon (HUL के अधीन, 400+ आउटलेट्स) और Geetanjali Salon ( 200+ लोकेशंस) जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। ऐसे माहौल में, Naturals का कंट्रोल अपने पास रखने पर जोर देना, यह संकेत देता है कि वे अपनी इंडिपेंडेंट ग्रोथ स्ट्रेटेजी पर भरोसा करते हैं। अगर Reliance के साथ डील फाइनल नहीं होती है, तो Naturals 2028 तक अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने पर विचार कर रही है। कंपनी इस साल 100 नए सैलून खोलने की योजना बना रही है, जिसके लिए IPO से पूंजी जुटाना एक विकल्प हो सकता है।
वैल्यूएशन का अंतर और संभावित जोखिम
इस गतिरोध का मुख्य जोखिम वैल्यूएशन (valuation) को लेकर संभावित अंतर है। Reliance की 51% हिस्सेदारी की मांग का मतलब है कि वे एक निश्चित वैल्यूएशन पर डील करना चाहते हैं, जो शायद Naturals के फाउंडर्स को कम लग रहा हो। वे मानते हैं कि भविष्य की ग्रोथ, खासकर IPO के जरिए, कंपनी को और अधिक वैल्यू दिला सकती है। दूसरी ओर, कंट्रोल छोड़ने में Naturals की झिझक Reliance के लिए यह संकेत दे सकती है कि कंपनी अपनी स्टैंडअलोन क्षमता को ओवरएस्टीमेट कर रही है। Reliance के लिए एक फाउंडर-led बिजनेस को अपने कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर में इंटीग्रेट करना एक चुनौतीपूर्ण काम हो सकता है। डील में देरी Naturals के लिए अवसर की लागत (opportunity cost) भी है, क्योंकि बाजार की स्थितियाँ या निवेशकों की रुचि 2028 तक बदल सकती है।