नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अगले हफ्ते से ग्लोबल निवेशकों के लिए रोडशो शुरू करने जा रहा है। इस IPO के जरिए NSE लगभग **$3 अरब** जुटाने की योजना बना रहा है। यह पूरी तरह से मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बिक्री (stake sale) के ज़रिये होगा। अगर यह सफल रहा, तो यह भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा पब्लिक लिस्टिंग (public listing) बन सकता है।
क्या है पूरी योजना?
दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (derivatives exchange) में से एक, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए औपचारिक निवेशक मार्केटिंग शुरू करने की तैयारी में है। कंपनी अगले हफ्ते से ही अमेरिका, लंदन, सिंगापुर, हांगकांग और मध्य पूर्व जैसे प्रमुख वित्तीय केंद्रों में बैठकों की एक सीरीज आयोजित करने की योजना बना रही है।
मौजूदा शेयरधारक बेचेंगे हिस्सेदारी
यह IPO पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (offer for sale) के रूप में संरचित है। इसका मतलब है कि कंपनी अपने व्यवसाय के संचालन के लिए नई पूंजी जुटाने के लिए नए शेयर जारी नहीं करेगी। इसके बजाय, मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं। ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, कंपनी 148.9 मिलियन शेयरों तक की बिक्री का प्रस्ताव रखती है, जो कंपनी की कुल इक्विटी का लगभग 6% है। यह सेकेंडरी सेल (secondary sale) का तरीका है, जिससे IPO से होने वाली आय कंपनी के विस्तार के बजाय बेचने वाले शेयरधारकों को मिलेगी।
बन सकता है भारत का सबसे बड़ा IPO
बाजार की निगाहें NSE के वैल्यूएशन पर टिकी हैं। वर्तमान में, NSE अनलिस्टेड (unlisted) यानी ग्रे मार्केट (gray market) में 5.25 ट्रिलियन रुपये से अधिक के वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है, जो लगभग $55.1 बिलियन के बराबर है। इस बाजार मूल्य के आधार पर, पेश किए जा रहे स्टेक का कुल मूल्य लगभग 306 बिलियन रुपये तक पहुंच सकता है। यदि कंपनी लिस्टिंग पर इस रेंज में वैल्यूएशन हासिल करती है, तो यह 2024 में हुए Hyundai Motor India के 278.7 बिलियन रुपये के IPO को पार कर भारत का सबसे बड़ा IPO बन जाएगा।
बैंकिंग सिंडिकेट और समय-सीमा
इतने बड़े पैमाने पर लिस्टिंग को प्रबंधित करने के लिए, एक्सचेंज ने लगभग 20 इन्वेस्टमेंट बैंकों का एक बड़ा सिंडिकेट (syndicate) तैयार किया है। इस समूह में कोटक महिंद्रा कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल, मॉर्गन स्टेनली, एचएसबीसी और सिटीग्रुप जैसे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दिग्गज शामिल हैं। हालांकि एक्सचेंज वर्तमान में सितंबर में IPO का लक्ष्य बना रहा है, लेकिन अंतिम समय-सीमा और वैल्यूएशन बाजार की स्थितियों और इन बैंकिंग भागीदारों के साथ चल रही चर्चाओं पर निर्भर करेगा।
रेगुलेटरी और मार्केट का माहौल
भारतीय इक्विटी और डेरिवेटिव्स बाजारों के लिए प्राथमिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर के रूप में, NSE का बिजनेस परफॉरमेंस घरेलू ट्रेडिंग वॉल्यूम और भारतीय शेयर बाजार के समग्र स्वास्थ्य से गहराई से जुड़ा हुआ है। हालांकि एक्सचेंज का डेरिवेटिव्स स्पेस में दबदबा है, यह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की कड़ी निगरानी में काम करता है। भविष्य में निवेशकों की रुचि इस बात पर निर्भर करेगी कि एक्सचेंज प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ अपनी बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने और बाजार की अखंडता व प्रौद्योगिकी उन्नयन से संबंधित नियामक आवश्यकताओं को पूरा करने में कितना सक्षम है। निवेशक सितंबर में सार्वजनिक सब्सक्रिप्शन अवधि के लिए अंतिम मूल्य निर्धारण, रोडशो के दौरान विशिष्ट निवेशक मांग और आधिकारिक तारीखों पर अपडेट की निगरानी करेंगे।
