National Stock Exchange (NSE) ने अपने बहुप्रतीक्षित IPO के साइज को घटाकर **₹24,000 करोड़** से **₹27,000 करोड़** के बीच तय किया है। पहले इसके **₹30,000 करोड़** होने का अनुमान था।
बदल गया है IPO का गणित
NSE ने अपनी लिस्टिंग की योजनाओं में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने अपने IPO के साइज को पहले के अनुमानित ₹30,000 करोड़ से घटाकर ₹24,000 करोड़ से ₹27,000 करोड़ के दायरे में ला दिया है। इसकी मुख्य वजह यह है कि कई मौजूदा इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स ने अपने शेयरों की बिक्री कम करने का फैसला किया है। वे उम्मीद कर रहे हैं कि लिस्टिंग के बाद उन्हें बेहतर वैल्यूएशन मिल सकती है।
यह पूरा इश्यू 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) रूट के जरिए आएगा, यानी कंपनी के पास कोई नया फंड नहीं आएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसका प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर के आसपास रहने की संभावना है।
कानूनी अड़चनें और रेगुलेटरी क्लीयरेंस
निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर यह है कि NSE ने अपनी पुरानी कानूनी लड़ाइयों को सुलझा लिया है। एक्सचेंज ने को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों में SEBI के साथ विवाद खत्म करने के लिए ₹1,491 करोड़ का सेटलमेंट किया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में अपनी सहमति दे दी है, जिससे लिस्टिंग का रास्ता साफ हो गया है।
रिस्क और आने वाली तारीखें
हालांकि सब कुछ पॉजिटिव दिख रहा है, लेकिन निवेशकों को सरकारी नीतियों और टैक्स स्ट्रक्चर पर नजर रखनी चाहिए। डेरिवेटिव ट्रेडिंग में ट्रांजेक्शन टैक्स या कैपिटल गेन्स टैक्स में कोई भी बदलाव कंपनी के रेवेन्यू पर सीधा असर डाल सकता है।
फिलहाल, इस IPO की सब्सक्रिप्शन विंडो 18 सितंबर, 2026 के आसपास खुलने की उम्मीद है और शेयर की लिस्टिंग 25 सितंबर, 2026 को हो सकती है।
