National Stock Exchange (NSE) की बाजार में शानदार शुरुआत हुई है। ₹1,785 के इश्यू प्राइस के मुकाबले शेयर ₹1,800 पर लिस्ट हुआ। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा IPO है।
बाजार में ऐतिहासिक आगाज
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में आज एक बड़ा दिन रहा। NSE ने अपने ₹22,569 करोड़ के मेगा IPO के साथ शेयर बाजार में कदम रखा है। निवेशकों की भारी डिमांड के चलते इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला और कुल बिड्स (Bids) का आंकड़ा लगभग ₹90,300 करोड़ तक पहुंच गया था। यह लिस्टिंग Hyundai Motor India के बाद भारत की अब तक की दूसरी सबसे बड़ी IPO पेशकश है, जिसने LIC के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।
प्रॉफिट और रेगुलेशन का संतुलन
निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह था कि एक लिस्टेड कंपनी के रूप में NSE अपने रेगुलेटरी कामकाज को कैसे संभालेगी? इस पर NSE के चेयरमैन श्रीनिवास इनजेटी ने साफ किया कि एक्सचेंज के लिए 'मार्केट इंटीग्रिटी' (Market Integrity) सबसे ऊपर है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कंपनी के कमर्शियल मुनाफे से ज्यादा महत्वपूर्ण बाजार की निष्पक्षता और रेगुलेटरी नियमों का पालन करना है।
भविष्य की राह
NSE अब एक मेंबर-ओन्ड यूटिलिटी से बदलकर एक लिस्टेड कॉर्पोरेट इकाई बन गया है। इसकी कमाई का मुख्य जरिया ट्रांजेक्शन चार्ज, डेटा सर्विसेज और कंपनियों से मिलने वाली लिस्टिंग फीस है। अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी अपने बिजनेस ग्रोथ और रेगुलेटरी जिम्मेदारी के बीच कैसे तालमेल बिठाती है। कंपनी पूरी तरह से SEBI की सख्त निगरानी में काम करेगी, और आने वाले समय में इसके ट्रांजेक्शन वॉल्यूम और पॉलिसी बदलाव ही शेयर के प्रदर्शन को तय करेंगे।
