NSE, Jio Platforms, Zepto, SBI MF: 2026 में इन 4 दिग्गजों के IPO लाएंगे बाज़ार में बहार!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
NSE, Jio Platforms, Zepto, SBI MF: 2026 में इन 4 दिग्गजों के IPO लाएंगे बाज़ार में बहार!

साल 2026 के दूसरे हिस्से में भारतीय बाज़ार में हलचल मचने वाली है! नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms), ज़ेप्टो (Zepto) और एसबीआई म्यूचुअल फंड (SBI Mutual Fund) जैसे चार बड़े नाम पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी कर रहे हैं। इन IPOs में फ्रेश कैपिटल रेज़ (Fresh Capital Raise) और मौजूदा शेयरहोल्डर्स की हिस्सेदारी बिक्री (Stake Sale) का मिश्रण देखने को मिलेगा, जो प्राइमरी मार्केट के लिए एक अहम दौर का संकेत है। निवेशकों को वैल्यूएशन और फंड के इस्तेमाल जैसे खास डिटेल्स पर नज़र रखनी चाहिए।

क्या हुआ है?

साल 2026 के दूसरे चरण में भारतीय प्राइमरी मार्केट (Primary Market) में काफी हलचल रहने की उम्मीद है, क्योंकि चार बड़ी कंपनियां पब्लिक लिस्टिंग की ओर बढ़ रही हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms), क्विक-कॉमर्स फर्म ज़ेप्टो (Zepto), और एसबीआई म्यूचुअल फंड (SBI Mutual Fund) सभी स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट होने की तैयारी में हैं। इन कंपनियों के IPOs के लक्ष्य अलग-अलग हैं, जिनमें शुरुआती निवेशकों को एग्जिट (Exit) देने से लेकर नई टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए कैपिटल जुटाना शामिल है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल करके लिस्टिंग की योजनाओं को आगे बढ़ाया है। यह पब्लिक ऑफर पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में संरचित होगा। इसका मतलब है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) जैसे मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचेंगे। इस प्रक्रिया से एक्सचेंज को कोई नया पैसा नहीं मिलेगा, क्योंकि यह मुख्य रूप से मौजूदा निवेशकों के लिए अपनी होल्डिंग्स से बाहर निकलने या उन्हें कम करने का एक तरीका है। NSE को BSE पर लिस्ट होने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी (In-principle approval) मिल गई है।

जियो प्लेटफॉर्म्स और ज़ेप्टो की योजनाएं

मुकेश अंबानी के डिजिटल इकोसिस्टम का एक अहम हिस्सा, जियो प्लेटफॉर्म्स ने फ्रेश कैपिटल जुटाने के लिए अपना DRHP फाइल किया है। कंपनी 27 करोड़ इक्विटी शेयर्स तक जारी करने का इरादा रखती है। जुटाई गई राशि का उपयोग इसकी सहायक कंपनियों के कर्ज को कम करने और 5G टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), और क्लाउड सर्विसेज जैसे हाई-ग्रोथ क्षेत्रों में विस्तार का समर्थन करने के लिए किया जाएगा। रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) बहुसंख्यक शेयरधारक बनी हुई है, जबकि ग्लोबल टेक दिग्गज मेटा (Meta) और गूगल (Google) की भी इस बिजनेस में हिस्सेदारी है।

वहीं, ज़ेप्टो (Zepto) अपनी पब्लिक मार्केट डेब्यू की ओर बढ़ रहा है, जिसकी योजना में फ्रेश इश्यू (Fresh Issue) और ऑफर फॉर सेल (OFS) दोनों शामिल हैं। कंपनी द्वारा जुटाई गई कैपिटल का इस्तेमाल डार्क स्टोर्स (Dark Stores) के अपने नेटवर्क का विस्तार करने और अपनी मार्केटिंग पहलों का समर्थन करने के लिए किया जाएगा। कंपनी पब्लिक इश्यू से पहले प्री-IPO प्लेसमेंट राउंड (Pre-IPO Placement Round) पर भी विचार कर सकती है।

एसबीआई म्यूचुअल फंड की लिस्टिंग

एसबीआई म्यूचुअल फंड ने अपने IPO के साथ आगे बढ़ने के लिए नियामक मंजूरी (Regulatory approval) हासिल कर ली है। NSE लिस्टिंग की तरह, यह भी पूरी तरह से OFS-आधारित पेशकश होगी। प्रमोटर्स, जिनमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और अमुंडी इंडिया होल्डिंग (Amundi India Holding) शामिल हैं, एसेट मैनेजमेंट कंपनी (Asset Management Company) में अपनी हिस्सेदारी कम करना चाहते हैं। लिस्ट होने के बाद, एसबीआई म्यूचुअल फंड भारत में सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के छोटे लेकिन बढ़ते समूह में शामिल हो जाएगा।

निवेशक क्या ट्रैक करें?

जब कंपनियां पब्लिक होने की तैयारी करती हैं, तो निवेशक आम तौर पर कई प्रमुख कारकों पर ध्यान देते हैं। पहला, फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल के बीच का अंतर महत्वपूर्ण है। फ्रेश इश्यू बिजनेस को बढ़ाने के लिए कंपनी में पैसा लाता है, जबकि OFS पुराने शेयरधारकों से नए शेयरधारकों को स्वामित्व हस्तांतरित करता है।

दूसरा, इन कंपनियों का वैल्यूएशन (Valuation) एक प्रमुख मॉनिटरेबल (Monitorable) होगा। निवेशकों को इन IPOs की प्राइसिंग की तुलना लिस्टेड साथियों के वैल्यूएशन से करनी चाहिए। तीसरा, जियो प्लेटफॉर्म्स और ज़ेप्टो जैसी कंपनियों के लिए, कैपिटल इन्वेस्टमेंट को प्रॉफिटेबल ग्रोथ (Profitable Growth) में बदलने की क्षमता एक प्रमुख दीर्घकालिक प्रश्न बनी हुई है। NSE और एसबीआई म्यूचुअल फंड के लिए, प्रतिस्पर्धी वित्तीय क्षेत्र में उनके बिजनेस मॉडल की स्थिरता संभावित शेयरधारकों के लिए प्राथमिक फोकस होगी।

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