National Stock Exchange (NSE) का ₹22,569 करोड़ का IPO आज बंद हो रहा है। इसकी प्राइस बैंड **₹1,700 से ₹1,785** तय की गई है। यह पूरी तरह से Offer for Sale (OFS) है, जिसमें बड़े इंस्टीट्यूशनल निवेशक अपनी हिस्सेदारी बरकरार रखे हुए हैं, जो कंपनी पर उनके भरोसे को दर्शाता है।
क्या है IPO का गणित?
यह IPO पूरी तरह से एक 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) है। इसका मतलब है कि कंपनी को इस पब्लिक इश्यू से कोई नया फंड नहीं मिलेगा; सारा पैसा शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरहोल्डर्स के पास जाएगा। इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने अपनी कुल होल्डिंग का केवल 5.11% हिस्सा ही बाजार में बेचा है, जबकि उनके पास 36.82% की बड़ी हिस्सेदारी थी। यह इस बात का संकेत है कि Aranda Investments, Stock Holding Corporation of India, SBI Capital Markets, और ChrysCapital जैसे बड़े नाम अभी भी कंपनी में अपनी लंबी अवधि की संभावनाएं देख रहे हैं।
इतिहास रचने वाली वैल्यूएशन
₹1,785 के अपर प्राइस बैंड पर NSE की वैल्यूएशन ₹4.42 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। भारतीय बाजार के इतिहास में यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा IPO है। यह Hyundai Motor India के ₹27,870 करोड़ के IPO के बाद सबसे बड़ा है और इसने LIC के ₹21,000 करोड़ वाले लिस्टिंग के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
चूंकि यह एक सेकेंडरी सेल है, इसलिए कंपनी की बैलेंस शीट में कोई नया कैश नहीं आएगा। NSE का भविष्य पूरी तरह से मार्केट पार्टिसिपेशन और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, SEBI की कड़ी रेगुलेटरी निगरानी और टेक्नोलॉजी अपग्रेड्स कंपनी के मुनाफे पर बड़ा असर डाल सकते हैं। अब सबकी नजर 24 सितंबर को होने वाली लिस्टिंग पर टिकी है कि यह शेयर बाजार में किस तरह का रिस्पॉन्स हासिल करता है।
