National Stock Exchange (NSE) ने अपना **₹22,569 करोड़** का IPO पेश कर दिया है, जिससे कंपनी की मार्केट वैल्यू **₹4.42 लाख करोड़** आंकी गई है। निवेशक इसके ऑप्शंस ट्रेडिंग पर भारी निर्भरता और बढ़ते रेगुलेटरी दबाव को लेकर सतर्क हैं।
IPO की डिटेल्स और वैल्यूएशन
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने ₹22,569 करोड़ के बहुप्रतीक्षित IPO के लिए प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर तय किया है। ऊपरी बैंड के हिसाब से एक्सचेंज की कुल वैल्यू ₹4.42 लाख करोड़ बैठती है। यह लिस्टिंग निवेशकों के लिए एक बड़े अवसर की तरह है, लेकिन कंपनी के बदलते फाइनेंशियल प्रोफाइल पर ध्यान देना जरूरी है।
ऑप्शंस ट्रेडिंग पर भारी निर्भरता
NSE की सबसे बड़ी चिंता उसका डेरिवेटिव्स मार्केट पर अत्यधिक निर्भर होना है। FY26 में, कंपनी के कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का लगभग 60.22% हिस्सा सिर्फ ऑप्शंस ट्रेडिंग से आया, जिसमें अकेले वीकली इंडेक्स ऑप्शंस का योगदान 46% रहा। हाल ही में डेरिवेटिव्स नियमों में सख्ती और सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ने से ट्रेडिंग वॉल्यूम पर सीधा असर पड़ा है।
गिरता मुनाफा और बढ़ती प्रतिस्पर्धा
कंपनी के हालिया आंकड़े कुछ चुनौतियां पेश करते हैं। FY26 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 3.15% गिरा है, जबकि नेट प्रॉफिट में 15.47% की गिरावट देखी गई है। इक्विटी ऑप्शंस का औसत दैनिक टर्नओवर ₹258.28 लाख करोड़ पर आ गया है, जो पहले ₹312.84 लाख करोड़ था। इसके अलावा, ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर में NSE की हिस्सेदारी FY24 के 96.86% से घटकर जून तिमाही में 68.48% रह गई है, जिससे साफ है कि BSE से कड़ी टक्कर मिल रही है।
भविष्य की उम्मीदें
इन चुनौतियों के बावजूद, NSE कैश इक्विटी सेगमेंट में 93% मार्केट शेयर के साथ अपनी बादशाहत कायम रखे हुए है। कंपनी अब अपनी आय के स्रोतों को विविधतापूर्ण बना रही है, जिसमें डेटा फीड्स, कोलोकेशन सर्विसेज और इंडेक्स लाइसेंसिंग शामिल हैं। यह सेगमेंट 18.4% की दर से बढ़ रहा है और कुल रेवेन्यू में इसका हिस्सा 12% तक पहुंच गया है। फिलहाल, 42.9 के P/E रेशियो पर आने वाला यह IPO रेगुलेटरी बदलावों और बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने की क्षमता पर टिका है।
