NSE IPO: बैंकर्स को मिले **₹186 करोड़** की मोटी फीस, जानें लिस्टिंग के खर्च का पूरा गणित

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AuthorMehul Desai|Published at:
NSE IPO: बैंकर्स को मिले **₹186 करोड़** की मोटी फीस, जानें लिस्टिंग के खर्च का पूरा गणित

NSE के IPO में शामिल मर्चेंट बैंकर्स को **₹186 करोड़** की भारी-भरकम फीस दी गई है, जो कुल लिस्टिंग खर्च का करीब आधा हिस्सा है। यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसका मतलब है कि पैसा कंपनी के पास नहीं बल्कि पुराने शेयरधारकों के पास जाएगा।

लिस्टिंग खर्च का ब्यौरा

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की हाई-प्रोफाइल लिस्टिंग के लिए खर्च का स्ट्रक्चर सामने आ गया है। फाइलिंग्स के मुताबिक, आईपीओ प्रक्रिया को संभालने वाले 20 मर्चेंट बैंकर्स को कुल ₹186.20 करोड़ की फीस दी गई है। यह पूरी लिस्टिंग प्रक्रिया पर हुए कुल ₹392.12 करोड़ के खर्च का लगभग 47% है।

तुलनात्मक नजरिया

भले ही यह रकम बड़ी लग रही हो, लेकिन हाल के अन्य बड़े आईपीओ की तुलना में यह कम है। उदाहरण के तौर पर, Hyundai Motor India ने बैंकर्स को करीब ₹493 करोड़ और Paytm (One97 Communications) ने ₹323 करोड़ की फीस दी थी। बैंकर्स की फीस के बाद, एडवरटाइजिंग और मार्केटिंग पर NSE ने ₹49.69 करोड़ खर्च किए, जो दूसरा सबसे बड़ा खर्च रहा।

निवेशकों के लिए जरूरी बात: OFS क्या है?

यह समझना जरूरी है कि NSE का आईपीओ एक 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) है। इसका मतलब है कि बाजार से जुटाया गया पैसा कंपनी के ऑपरेशंस, रिसर्च या कर्ज चुकाने के काम नहीं आएगा, क्योंकि नए शेयर जारी नहीं किए जा रहे हैं। इसमें केवल मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। इसी वजह से लिस्टिंग का सारा खर्च भी ये शेयरधारक ही उठा रहे हैं।

डिमांड और आगे की राह

आईपीओ को मार्केट में जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला और यह कुल 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ। इंस्टीट्यूशनल निवेशकों (QIBs) का हिस्सा 12.68 गुना भरा। एंकर निवेशकों से कंपनी पहले ही ₹6,746 करोड़ जुटा चुकी है, जिसमें LIC, नॉर्वे का पेंशन फंड और मॉनेटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर जैसे बड़े नाम शामिल थे। अब सबकी नजरें लिस्टिंग की तारीख पर हैं, जहां NSE अपने प्रतिद्वंदी BSE के साथ मार्केट में लिस्ट होकर नया वैल्यूएशन बेंचमार्क सेट करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.