नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अपने लंबे समय से प्रतीक्षित IPO के लिए SEBI की मंजूरी के करीब पहुँच गया है। उम्मीद है कि यह IPO सितंबर 2026 तक बाज़ार में आ सकता है। यह लगभग **₹30,000 करोड़** का बड़ा इश्यू होगा, जो कई सालों से चल रहे नियामकीय सवालों के हल होने के बाद आ रहा है।
SEBI से हरी झंडी की उम्मीद
NSE को संभवतः अगस्त 2026 तक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से IPO के लिए मंजूरी मिल सकती है। अगर सब ठीक रहा, तो एक्सचेंज 17 जुलाई को अमेरिका, यूके, हांगकांग और सिंगापुर जैसे बड़े वित्तीय केंद्रों में अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए रोड शो शुरू करेगा, जिसके बाद घरेलू रोड शो होंगे।
नियामकीय अड़चनें दूर
इस IPO का रास्ता आसान नहीं रहा है। सालों से चल रही नियामकीय जांच के बीच, NSE ने को-लोकेशन और डार्क फाइबर सेवाओं से जुड़े पुराने मामलों को IPO आवेदन से अलग करने का फैसला किया है। इन नियामकीय सवालों के हल और ज़रूरी सेटलमेंट प्रक्रियाओं के बाद, NSE ने सार्वजनिक बाज़ार में एंट्री की सबसे बड़ी रुकावट को दूर कर लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जनवरी में इन पुराने मामलों पर 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' मिलने के बाद एक्सचेंज ने अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) को फिर से फाइल किया था।
बाज़ार के लिए अहमियत
लगभग ₹30,000 करोड़ के अनुमानित इश्यू साइज के साथ, NSE IPO भारतीय शेयर बाज़ार के इतिहास के सबसे बड़े पब्लिक ऑफर्स में से एक बनने वाला है। इतने बड़े इश्यू के कारण, SEBI चेयरमैन से व्यक्तिगत मंजूरी ज़रूरी होगी। NSE का इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में दबदबा है और यह ट्रेडिंग वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया के सबसे बड़े एक्सचेंजों में से एक है। पिछले कुछ सालों में रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और कैपिटल मार्केट की ग्रोथ से एक्सचेंज की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।
ऐतिहासिक तुलना
NSE की लिस्टिंग का सफर भारत के अन्य मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थानों की तुलना में काफी लंबा रहा है। उदाहरण के लिए, BSE लिमिटेड ने 2016 में अपना DRHP फाइल करने के बाद लगभग 3.5 महीनों में IPO पूरा कर लिया था, जबकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) को लगभग सात महीने लगे थे। हाल ही में, CDSL और NSDL जैसे डिपॉजिटरी संस्थानों के IPO रिव्यू लगभग 66 से 83 दिनों में पूरे हुए। NSE का एक दशक का सफर उन नियामकीय मुद्दों की जटिलता को दर्शाता है जिन्हें उसे इस मुकाम तक पहुंचने से पहले हल करना पड़ा।
निवेशकों को SEBI की तरफ से औपचारिक ऑब्जर्वेशन लेटर का इंतजार करना चाहिए, जो IPO की तारीखें तय होने से पहले एक ज़रूरी कदम है। नियामकीय मंजूरी के अलावा, सितंबर में लॉन्च की अंतिम तारीख बाज़ार की मौजूदा स्थितियों पर भी निर्भर करेगी, क्योंकि एक्सचेंज इतने बड़े कैपिटल रेज़ के लिए एक स्थिर माहौल सुनिश्चित करना चाहेगा।
