National Stock Exchange का ₹22,569 करोड़ का IPO खुल चुका है। पहले दिन इसे **43%** सब्सक्रिप्शन मिला, जिसमें नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स सबसे आगे रहे। रेगुलेटरी बदलावों के चलते निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं।
पहले दिन का सब्सक्रिप्शन गणित
NSE के ₹22,569 करोड़ के IPO को पहले दिन बाजार से मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला है। कुल 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 3.83 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगी हैं। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) ने 72% कोटा भर दिया है, जबकि रिटेल निवेशकों ने 44% दिलचस्पी दिखाई है। बड़े संस्थानों यानी QIBs का कोटा फिलहाल 19% भरा है, जिनका असर आमतौर पर आखिरी दिन देखने को मिलता है।
रेगुलेटरी दबाव और रिस्क फैक्टर
कंपनी ने प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 के बीच तय किया है, जिससे NSE की वैल्यूएशन लगभग $46 बिलियन आंकी गई है। हालांकि, बाजार में चर्चा इस बात की है कि क्या NSE की ग्रोथ बरकरार रहेगी? दरअसल, NSE का करीब 60% रेवेन्यू ऑप्शंस ट्रेडिंग से आता है। डेरिवेटिव्स मार्केट में सट्टेबाजी को कम करने के लिए हालिया रेगुलेटरी बदलावों के कारण वॉल्यूम में गिरावट देखी गई है, जो निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण है।
OFS है बड़ा फैक्टर, एंकर्स का है साथ
यह समझना जरूरी है कि यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है। इसका मतलब है कि पैसा कंपनी के पास नहीं बल्कि पुराने शेयरधारकों की जेब में जाएगा। हालांकि, खराब बाजार सेंटीमेंट के बावजूद, एंकर इन्वेस्टर्स ने ₹6,746 करोड़ लगाकर भरोसा जताया है। इस लिस्ट में LIC, Goldman Sachs, Fidelity, GIC Singapore, Abu Dhabi Investment Authority, Norges Bank और HSBC जैसे दिग्गज शामिल हैं। Hyundai Motor India के बाद यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू है।
