National Stock Exchange (NSE) का **₹22,569 करोड़** का IPO कुल **5.71 गुना** सब्सक्राइब हो गया है। इसे भारत के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर माना जा रहा है।
बाजार में जबरदस्त डिमांड
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO शानदार तरीके से बंद हुआ है। निवेशकों ने 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 50.58 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाईं, जिससे कुल डिमांड करीब ₹90,300 करोड़ तक पहुंच गई। यह इश्यू Hyundai Motor India के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा IPO बन गया है।
किसने किया सबसे ज्यादा निवेश?
इस IPO को मुख्य रूप से क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) का साथ मिला, जिन्होंने अपने हिस्से को 12.68 गुना सब्सक्राइब किया। वहीं, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने 6.55 गुना और रिटेल निवेशकों ने 1.39 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज कराया। रिटेल कैटेगरी में कम सब्सक्रिप्शन होने के कारण निवेशकों को शेयर मिलने की उम्मीदें काफी बेहतर हैं।
बिजनेस मॉडल और रिस्क फैक्टर
NSE का बिजनेस मुख्य रूप से ट्रांजैक्शन चार्ज, डेटा फीस और लिस्टिंग फीस पर निर्भर है। हालाँकि यह एक मुनाफे वाला बिजनेस है, लेकिन SEBI के कड़े नियम हमेशा एक बड़ा रिस्क फैक्टर रहते हैं। रेगुलेटर कभी भी ट्रांजैक्शन चार्ज में बदलाव कर सकता है, जिसका सीधा असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ेगा। साथ ही, BSE और GIFT City जैसे प्लेटफॉर्म्स से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा पर भी नजर रखनी होगी।
आगे क्या होगा?
अब सभी निवेशकों की निगाहें शेयर अलॉटमेंट पर टिकी हैं। कंपनी जल्द ही शेयरों का वितरण शुरू करेगी। ग्रे मार्केट में अभी करीब 3% के लिस्टिंग गेन के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक एक्सचेंज फाइलिंग पर ही भरोसा करें।
