National Stock Exchange (NSE) का बहुप्रतीक्षित IPO अब बंद हो चुका है। अंतिम दिन तक इसे कुल **1.46 गुना** सब्सक्रिप्शन मिला है। अब निवेशकों की नजरें **24 सितंबर** को होने वाली स्टॉक मार्केट लिस्टिंग पर टिकी हैं।
सब्सक्रिप्शन का गणित
NSE के इस मेगा IPO में निवेशकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) सबसे आगे रहे और उन्होंने अपने हिस्से का 2.31 गुना आवेदन किया। वहीं, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा 1.83 गुना भरा। हालांकि, रिटेल निवेशकों ने सतर्कता बरतते हुए अपने हिस्से को केवल 87% तक ही सब्सक्राइब किया।
वैल्युएशन और रिस्क फैक्टर
कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 तय किया है, जिससे कंपनी की मार्केट वैल्यूएशन ₹4.42 लाख करोड़ बैठती है। 42.9x के P/E रेशियो पर एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसमें गलतियों के लिए बहुत कम जगह है। इसके अलावा, कंपनी की कमाई का एक बड़ा हिस्सा ऑप्शन ट्रेडिंग फीस से आता है। SEBI की बढ़ती सख्ती और भविष्य में रेगुलेटरी बदलाव का असर कंपनी की टॉप-लाइन पर पड़ सकता है।
IPO की संरचना
यह पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसका मतलब है कि जुटाए गए ₹22,569 करोड़ में से एक रुपया भी कंपनी के खजाने में नहीं जाएगा, बल्कि यह रकम सीधे बिकवाली करने वाले शेयरधारकों को मिलेगी।
आगे क्या?
अब निवेशकों को 22 सितंबर को होने वाले शेयर अलॉटमेंट का इंतजार है। इसके बाद, 24 सितंबर को यह स्टॉक BSE पर दस्तक देगा। लंबी अवधि के निवेशक अब एक्सचेंज के कैश मार्केट वॉल्यूम और डेरिवेटिव्स एक्टिविटी पर नजर रख रहे हैं, जो बिजनेस की असली ताकत हैं।
