NSE का **₹22,561 करोड़** का बहुप्रतीक्षित IPO कुल **5.7 गुना** सब्सक्राइब होकर बंद हो गया है। यह पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) है, इसलिए पैसा कंपनी की जगह पुराने शेयरहोल्डर्स के पास जाएगा। शेयर **24 सितंबर, 2026** को BSE पर लिस्ट होंगे।
बाजार का भरोसा और सब्सक्रिप्शन
सोमवार को समाप्त हुए इस मेगा IPO को निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। आंकड़ों के मुताबिक, इस इश्यू को कुल 5.69 गुना सब्सक्राइब किया गया। कुल 50 करोड़ से ज्यादा शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुई हैं, जिसमें इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की भागीदारी सबसे अहम रही है। यह आंकड़ा भारतीय शेयर बाजार में NSE के दबदबे पर निवेशकों के अटूट भरोसे को दर्शाता है।
OFS का गणित और फंड का खेल
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि ₹22,561 करोड़ का यह पूरा ऑफर एक 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) है। इसका मतलब यह है कि जुटाया गया सारा पैसा कंपनी के नए ग्रोथ प्रोजेक्ट्स में नहीं जाएगा, बल्कि यह उन बैंकों और प्राइवेट इक्विटी फर्म्स की जेब में जाएगा जो अपने हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकल रहे हैं। चूंकि एक्सचेंज पहले से ही प्रॉफिटेबल है और उसे संचालन के लिए कम पूंजी की जरूरत है, इसलिए कंपनी को फंड की कोई खास दरकार नहीं थी।
लंबी कानूनी लड़ाई और गवर्नेंस
NSE के लिए शेयर बाजार तक का रास्ता आसान नहीं रहा है। को-लोकेशन (colocation) मामले में SEBI की जांच और पेनल्टी के कारण इसे सालों तक अपनी लिस्टिंग टालनी पड़ी थी। अब जबकि कंपनी लिस्टिंग की दहलीज पर है, निवेशकों के लिए इसके गवर्नेंस रिकॉर्ड और कॉम्पिटिशन के बीच मार्केट शेयर बनाए रखने की क्षमता पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
आगे की टाइमलाइन
अब निवेशकों की निगाहें अलॉटमेंट स्टेटस पर हैं, जो 22 सितंबर को जारी होगा। 23 सितंबर तक सफल आवेदकों के डीमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट कर दिए जाएंगे और 24 सितंबर को NSE के शेयर BSE के प्लेटफॉर्म पर ट्रेड होते नजर आएंगे। अब देखना यह होगा कि BSE के साथ लिस्ट होकर NSE का परफॉर्मेंस कैसा रहता है।
