NSE IPO का रास्ता साफ! SEBI सेटलमेंट के बाद ₹75 अरब तक पहुंच सकता है एक्सचेंज, निवेशकों की बल्ले-बल्ले!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
NSE IPO का रास्ता साफ! SEBI सेटलमेंट के बाद ₹75 अरब तक पहुंच सकता है एक्सचेंज, निवेशकों की बल्ले-बल्ले!
Overview

लगभग एक दशक के इंतजार और कई रेगुलेटरी बाधाओं के बाद, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO (Initial Public Offering) अब हकीकत बनने की ओर है। SEBI के साथ **₹1,880 करोड़** के सेटलमेंट ने 'को-लोकेशन' और 'डार्क फाइबर' विवादों को सुलझा दिया है, जिससे स्टॉक एक्सचेंज का वैल्यूएशन **$75 बिलियन** (लगभग **₹6-7 लाख करोड़**) तक पहुंचने का अनुमान है।

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NSE के IPO का टारगेट वैल्यूएशन ₹6 ट्रिलियन से ₹7 ट्रिलियन (यानी $65 बिलियन से $75 बिलियन) के बीच रखा गया है। यह वैल्यूएशन NSE को भारत की टॉप 7 सबसे मूल्यवान कंपनियों की लिस्ट में शामिल कर देगा। इस पब्लिक ऑफर में Life Insurance Corporation of India (LIC) और State Bank of India (SBI) जैसे बड़े निवेशक अपनी करीब 4.5-5% हिस्सेदारी बेचेंगे। अगर यह IPO अपने ऊपरी वैल्यूएशन रेंज पर आता है, तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन जाएगा, जो पिछले साल Hyundai Motor India के ₹27,870 करोड़ के IPO को भी पीछे छोड़ सकता है।

इस IPO की राह में सबसे बड़ी बाधा SEBI के साथ लंबे समय से चल रहे 'को-लोकेशन' और 'डार्क फाइबर' के विवाद थे। अब SEBI की सलाहकार समिति ने इन विवादों को सुलझाने के लिए ₹1,880 करोड़ के सेटलमेंट की सिफारिश की है। यह राशि NSE के शुरुआती ऑफर ₹1,387.39 करोड़ से अधिक है। इस सेटलमेंट के साथ ही, एक्सचेंज अगले महीने अपना ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस फाइल कर सकता है। कंपनी ने हाल ही में Q3FY26 के नतीजे पेश किए हैं, जिसमें शुद्ध लाभ (Net Profit) में 15% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह ₹2,408 करोड़ पर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी ऊंचे ट्रेडिंग वॉल्यूम और बेहतर लागत प्रबंधन के कारण हुई।

घरेलू शेयर बाजार में NSE का मुख्य मुकाबला BSE (Bombay Stock Exchange) से है, जिसकी मार्केट कैप लगभग ₹1.5 लाख करोड़ है और P/E रेशियो करीब 93.8 है। हालांकि NSE इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में दबदबा रखती है, लेकिन हाल के दिनों में BSE ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में अपनी हिस्सेदारी काफी बढ़ाई है। वित्तीय वर्ष 26 की पहली छमाही (H1 FY26) में NSE का शेयर 74% से घटकर 61% रह गया, वहीं BSE का शेयर 26% से बढ़कर 38% हो गया।

NSE के IPO के रास्ते में कुछ चुनौतियां भी हैं। BSE से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के अलावा, वैश्विक स्तर पर बड़े एक्सचेंज भी एक बड़ी चुनौती पेश करते हैं। डेरिवेटिव्स सेगमेंट में मार्केट शेयर में आई गिरावट चिंता का विषय है, और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर अत्यधिक निर्भरता के कारण नियामक जांच का बढ़ता दायरा भी एक जोखिम है। इसके अतिरिक्त, 200,000 से अधिक शेयरधारकों के विशाल और विविध समूह का प्रबंधन करना एक जटिल कार्य होगा।

SEBI के साथ विवादों का समाधान और सफल IPO लॉन्च, भारत के वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक नया कीर्तिमान स्थापित कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में मौजूदा वोलेटिलिटी (Volatility) के बावजूद, NSE की मजबूत फंडामेंटल्स और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में इसकी अग्रणी स्थिति निवेशकों को आकर्षित करेगी। यह IPO मौजूदा शेयरधारकों को लिक्विडिटी (Liquidity) प्रदान करेगा और एक महत्वपूर्ण सेक्टर में निवेश का एक अनूठा अवसर देगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.