National Stock Exchange (NSE) को SEBI से लंबे समय से प्रतीक्षित IPO के लिए ऑब्जर्वेशन लेटर मिल गया है। यह इश्यू लगभग **₹30,000 करोड़** का हो सकता है। यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसमें SBI और CPPIB जैसे बड़े शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।
कानूनी बाधाएं दूर, अब बाजार में दस्तक
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से जरूरी रेगुलेटरी मंजूरी हासिल कर ली है। यह मंजूरी सुप्रीम कोर्ट द्वारा को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों में रेगुलेटर और एक्सचेंज के बीच समझौते को स्वीकार करने के ठीक एक दिन बाद मिली है, जिससे एक्सचेंज के पब्लिक मार्केट में आने का रास्ता साफ हो गया है।
IPO की बारीकियां
यह IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसमें लगभग 14.89 करोड़ शेयर बिक्री के लिए पेश किए जाएंगे। चूंकि यह मौजूदा निवेशकों द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचने का मामला है, इसलिए कंपनी के पास विस्तार के लिए कोई नया फंड नहीं आएगा। बाजार जानकारों के अनुसार, इस इश्यू की वैल्यू करीब ₹30,000 करोड़ हो सकती है। अगर यह सफल रहा, तो यह 2024 में आए Hyundai Motor India के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बन जाएगा।
कौन बेच रहा है हिस्सा?
इस निकासी प्रक्रिया में State Bank of India (SBI), SBI Capital Markets, Canada Pension Plan Investment Board और Bank of Baroda जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इसके अलावा, General Insurance Corporation of India और New India Assurance जैसी बीमा कंपनियां भी अपनी हिस्सेदारी बेचेंगी। लिस्टिंग BSE पर होने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर
निवेशकों को यह समझना होगा कि NSE का बिजनेस मॉडल मुख्य रूप से डेरिवेटिव्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर टिका है, जो एक कंसंट्रेशन रिस्क भी हो सकता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक बड़ी राहत है, लेकिन रेगुलेटरी कंप्लायंस पर नजर रखना जरूरी है। चूंकि यह पूरी तरह OFS है, कंपनी की बैलेंस शीट में कोई नया कैश नहीं आएगा। अब बाजार की नजरें प्राइस बैंड और सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों पर होंगी, जो संभवतः सितंबर 2026 से पहले सामने आएंगे।
