National Stock Exchange (NSE) के लिए लंबे समय से चला आ रहा इंतजार खत्म हो गया है। SEBI ने एक्सचेंज के बहुप्रतीक्षित IPO को फाइनल मंजूरी दे दी है, जिसका साइज करीब **₹30,000 करोड़** बताया जा रहा है।
10 साल का लंबा इंतजार खत्म
आखिरकार NSE का पब्लिक होने का सपना सच होता दिख रहा है। SEBI की फाइनल ऑब्जर्वेशन मिलते ही भारतीय कैपिटल मार्केट के इतिहास में एक बड़े आईपीओ का रास्ता साफ हो गया है। यह पूरा इश्यू 100% ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में होगा, जिसमें मौजूदा शेयरहोल्डर अपने 14.89 करोड़ शेयर्स बेचेंगे। इसका मतलब यह है कि कंपनी इस IPO से कोई नया फंड नहीं जुटाएगी, बल्कि मौजूदा निवेशकों को अपना हिस्सा बेचने का मौका मिलेगा।
कानूनी पचड़ों से मिली मुक्ति
NSE का यह सफर आसान नहीं रहा। 2016 में पहली बार कोशिश करने के बाद कंपनी को को-लोकेशन और डार्क फाइबर विवादों के चलते कई सालों तक रेगुलेटरी जांच का सामना करना पड़ा। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा SEBI की अपीलों को खारिज करने के बाद सभी कानूनी बाधाएं दूर हो गई हैं।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
दुनिया का सबसे एक्टिव डेरिवेटिव्स एक्सचेंज होने के बावजूद, NSE के रेवेन्यू का सीधा संबंध मार्केट वॉल्यूम से है। चूंकि यह पूरी तरह से OFS है, इसलिए सारा पैसा बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को जाएगा, कंपनी के बैलेंस शीट में नहीं। आगे चलकर रेगुलेटरी बदलाव या डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर सख्त नियमों का असर इसकी कमाई पर पड़ सकता है।
आगे की टाइमलाइन
बाजार की नजर अब इसकी लिस्टिंग पर है। उम्मीद है कि कंपनी 11 सितंबर 2026 के आसपास प्राइस बैंड का ऐलान कर देगी और 26 सितंबर 2026 से पहले इसकी मार्केट में लिस्टिंग पूरी हो सकती है।
