Moneyview Limited ने 1 अक्टूबर, 2026 को शेयर बाजार में तूफानी शुरुआत की। कंपनी का शेयर **₹34** के इश्यू प्राइस के मुकाबले **₹55.61** पर लिस्ट हुआ। हालांकि निवेशकों में जबरदस्त उत्साह है, लेकिन बढ़ते लोन डिफॉल्ट और रेगुलेटरी दबाव पर नजर रखना जरूरी है।
बाजार में धाकड़ शुरुआत
Moneyview के आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था, जो लिस्टिंग के दिन भी कायम रहा। कंपनी का शेयर NSE और BSE पर 63.5% के प्रीमियम के साथ लिस्ट हुआ। निवेशकों की दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह आईपीओ 98.46 गुना सब्सक्राइब हुआ था। सबसे ज्यादा दिलचस्पी 'क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स' (QIB) ने दिखाई, जिनका सब्सक्रिप्शन 227.45 गुना रहा।
मुनाफे की सुस्त रफ्तार
लिस्टिंग के जश्न के बीच, निवेशकों को कंपनी के फाइनेंशियल सेहत पर भी ध्यान देना चाहिए। पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹243 करोड़ रहा, जो उसके पिछले साल के ₹240 करोड़ के मुकाबले लगभग स्थिर है। भले ही रेवेन्यू बढ़ा है, लेकिन लोन डिफॉल्ट के चलते प्रोविजनिंग (Impairment Charges) ने कंपनी के बॉटम-लाइन पर दबाव बना रखा है।
RBI की सख्ती और लोन क्वालिटी का रिस्क
कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अनसिक्योर्ड लोन की बढ़ती एनपीए (Gross Stage 3 Loans) है। जून 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 2.72% हो गया है, जो पिछले साल महज 0.94% था। RBI की डिजिटल लेंडिंग सेक्टर पर नजरें सख्त हैं, जो कंपनी के बिजनेस मॉडल के लिए चिंता का विषय है।
इसके अलावा, कंपनी पर 'डिफ़ॉल्ट लॉस गारंटी' (DLG) का भी बड़ा दबाव है। फिलहाल DLG के तहत ₹1,061 करोड़ की लायबिलिटी है, जो कंपनी की नेटवर्थ का एक बड़ा हिस्सा है। अगर लोन डिफॉल्ट इसी रफ्तार से बढ़े, तो बैलेंस शीट पर भारी असर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए कंपनी का क्रेडिट रिस्क मैनेजमेंट और लेंडिंग मार्जिन आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर्स रहेंगे।
