डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म Moneyview ने अपने प्रस्तावित IPO में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने फ्रेश इश्यू के साइज को **₹1,500 करोड़** से घटाकर अब **₹750 करोड़** कर दिया है। SEBI के नए रेगुलेटरी नियमों के बीच कंपनी ने अपनी कैपिटल स्ट्रैटेजी को फिर से तैयार किया है।
IPO स्ट्रैटेजी में बदलाव
SEBI के नए रेगुलेटरी संशोधनों का लाभ उठाते हुए Moneyview ने अपने IPO की योजना में बदलाव किया है। अब कंपनी बाजार से नए शेयरों के जरिए ₹750 करोड़ जुटाएगी, जो पहले की योजना के मुकाबले 50% कम है। अच्छी बात यह है कि इस बदलाव के लिए कंपनी को दोबारा ड्राफ्ट पेपर फाइल करने की जरूरत नहीं पड़ी।
फाइनेंशियल हेल्थ और लक्ष्य
31 दिसंबर, 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी ने 9 महीने की अवधि में ₹2,373 करोड़ का रेवेन्यू और ₹210 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है। कंपनी का AUM यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट इस दौरान ₹19,814 करोड़ रहा। IPO से मिलने वाली राशि का ₹325 करोड़ हिस्सा लोन डिस्बर्सल के लिए DLG (Default Loss Guarantee) अरेंजमेंट में इस्तेमाल होगा, जबकि ₹250 करोड़ का निवेश कंपनी अपनी सब्सिडियरी Whizdm Finance में करेगी।
OFS और निवेशकों का रुख
IPO के OFS (ऑफर फॉर सेल) हिस्से में भी कटौती की गई है। कुल शेयरों की संख्या अब 13.6 करोड़ से घटकर 10.04 करोड़ रह गई है। बड़े निवेशकों की बात करें तो Accel, Crimson Winter और Ribbit Capital ने अपनी हिस्सेदारी घटाने की योजना को धीमा कर दिया है, जबकि Apis Partners अब इस ऑफर से पूरी तरह बाहर हो गई है। वहीं, चित्रा अग्रवाल ने 19.35 लाख शेयर बेचने की योजना के साथ लिस्ट में एंट्री ली है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
डिजिटल लेंडिंग बिजनेस में रिस्क और मौके दोनों हैं। Moneyview का बड़ा रेवेन्यू कुछ चुनिंदा फाइनेंशियल पार्टनर्स पर निर्भर है। साथ ही, कंपनी 'थिन-फाइल' उधारकर्ताओं को लोन देती है, जहां क्रेडिट रिस्क मैनेजमेंट काफी अहम हो जाता है। आगे चलकर कंपनी का हाइब्रिड मॉडल और रेगुलेटरी माहौल पर उनकी पकड़ ही तय करेगी कि लंबा प्रदर्शन कैसा रहने वाला है।
