आज का IPO मार्केट अब पुरानी तरह का नहीं रहा। आजकल निवेशकों का पूरा फोकस SpaceX और Anthropic जैसी चुनिंदा मेगा-कैप कंपनियों पर सिमट गया है। एनालिस्ट्स ने चेताया है कि हाई वैल्यूएशन और घटती ग्रोथ रेट के चलते लंबे समय में रिटर्न मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
IPO के बाजार का मिजाज अब पूरी तरह बदल चुका है। 1990 के दशक के आखिर में डॉट-कॉम एरा के दौरान सैकड़ों छोटी कंपनियां लिस्ट होती थीं, लेकिन आज बाजार पर कुछ चुनिंदा, बेहद महंगी और विशाल कंपनियों का कब्जा है। यह बदलाव निवेशकों के लिए एक नया रिस्क प्रोफाइल तैयार कर रहा है।
आंकड़ों की जुबानी (DataTrek Research)
डेटाट्रैक रिसर्च की रिपोर्ट में एक बड़ा अंतर सामने आया है। साल 1999 में 476 कंपनियों ने IPO लॉन्च किए थे, जिन्होंने कुल $65 बिलियन जुटाए थे। इसके उलट, आज का निवेश सिर्फ कुछ गिने-चुने दिग्गजों जैसे SpaceX और Anthropic पर केंद्रित है। इसका मतलब है कि अब पैसा एक विविध पोर्टफोलियो के बजाय बहुत ऊंचे दांव वाली बड़ी कंपनियों में जा रहा है।
Anthropic पर उठते सवाल
Anthropic के फाइनेंशियल डेटा पर अब जानकारों की कड़ी नजर है। कंपनी का रेवेन्यू तो ज्यादा है, लेकिन तीसरी तिमाही में इसकी ग्रोथ घटकर 45% रह गई है। निवेशकों के लिए यह एक चिंता का विषय है क्योंकि टेक कंपनियों से अक्सर बहुत तेज ग्रोथ की उम्मीद की जाती है। इसके अलावा, $1.5 ट्रिलियन के वैल्यूएशन पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कंपनी को अब सस्ते और ओपन-सोर्स AI विकल्पों से कड़ी टक्कर मिल रही है।
Nvidia से तुलना क्यों गलत है?
अक्सर नए AI IPOs की तुलना Nvidia के शुरुआती दिनों से की जाती है। जब Nvidia पब्लिक हुई थी, तब उसका वैल्यूएशन महज $600 मिलियन था, जिसने उसे दशकों तक बढ़ने का मौका दिया। लेकिन आज की AI कंपनियां सीधे बहुत ऊंचे वैल्यूएशन पर लिस्ट हो रही हैं। 'Law of Large Numbers' के चलते, इन कंपनियों के पास पुरानी टेक दिग्गजों की तरह तेजी से बढ़ने की गुंजाइश कम बची है।
निवेशकों के लिए सबक
मौजूदा स्ट्रक्चरल बदलाव यह बताता है कि नए IPOs में 'रिस्क-रिवॉर्ड' का खेल बदल गया है। मेगा-कैप लिस्टिंग में एंट्री प्राइस बहुत ज्यादा है, जिससे भविष्य की कमाई के आधार पर वैल्युएशन को सही ठहराने का दबाव बढ़ गया है। निवेशकों को अब केवल ग्रोथ ही नहीं, बल्कि रेवेन्यू की निरंतरता और प्रॉफिट मार्जिन की मजबूती पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
