Milky Mist Dairy Foods ने अपने IPO का साइज घटाकर **₹15.53 अरब** कर दिया है, जो पहले **₹20.35 अरब** था। कंपनी के आवेदन **11 अगस्त** से खुलेंगे, जबकि एंकर निवेशकों के लिए बोली **10 अगस्त** को लगेगी। IPO साइज में यह कटौती हालिया प्री-IPO फंडिंग के बाद हुई है, लेकिन निवेशकों को कंपनी पर ऊंचे कर्ज और पतले प्रॉफिट मार्जिन का गंभीरता से मूल्यांकन करना चाहिए।
Milky Mist Dairy Foods ने IPO साइज में की कटौती
Milky Mist Dairy Foods ने अपने आगामी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) का साइज घटाकर ₹15.53 अरब कर दिया है, जो पहले ₹20.35 अरब का था। कंपनी ने पुष्टि की है कि पब्लिक सब्सक्रिप्शन 11 अगस्त को खुलेगा और 13 अगस्त को बंद होगा। एंकर निवेशक, जो अक्सर रिटेल पार्टिसिपेशन की दिशा तय करने में भूमिका निभाते हैं, 10 अगस्त को अपनी बोलियां लगाएंगे।
प्री-IPO फंडिंग और IPO की संरचना
फंडिंग लक्ष्य में यह कमी मई 2026 में हुए एक महत्वपूर्ण प्री-IPO राउंड के बाद आई है, जिसमें कंपनी ने ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म Temasek की सहायक कंपनी Jongsong Investments से ₹482 करोड़ जुटाए थे। मौजूदा IPO स्ट्रक्चर में ₹14.28 अरब के नए शेयर जारी किए जाएंगे, साथ ही मौजूदा शेयरधारकों द्वारा ₹1.25 अरब का ऑफर-फॉर-सेल (OFS) शामिल है।
निवेशकों के लिए चिंता का सबब: कर्ज और मार्जिन
संभावित निवेशकों के लिए, कंपनी की वित्तीय संरचना पर बारीकी से नजर रखना महत्वपूर्ण है। वित्तीय वर्ष 2025 के अपने खुलासों में, Milky Mist ने कुल ₹1,376.38 करोड़ का कर्ज दर्ज किया था, जिसके परिणामस्वरूप 4.20x का डेट-टू-इक्विटी रेशियो रहा। मौजूदा कैपिटल स्ट्रक्चर में हाई लेवरेज एक महत्वपूर्ण कारक है, और कंपनी ने संकेत दिया है कि IPO से प्राप्त राशि का एक हिस्सा कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। पतले नेट प्रॉफिट मार्जिन - जो FY25 में 1.96% थे - को मैनेज करते हुए इस कर्ज के बोझ को संतुलित करना मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
डेयरी सेक्टर और भौगोलिक जोखिम
निवेशकों को भारतीय डेयरी सेक्टर के व्यापक परिदृश्य पर भी विचार करना चाहिए। इंडस्ट्री को हाल ही में परफॉर्मेंस चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसमें Hatsun Agro Product, Dodla Dairy और Parag Milk Foods जैसे कई लिस्टेड पीयर्स ने 2026 के दौरान शेयर प्राइस प्रेशर का अनुभव किया है। इसके अलावा, Milky Mist एक भौगोलिक एकाग्रता जोखिम का सामना करता है, क्योंकि इसका लगभग 71% रेवेन्यू दक्षिणी भारतीय बाजार से आता है। इस क्षेत्र में किसी भी स्थानीय आर्थिक या मांग में बदलाव का कंपनी के समग्र वित्तीय प्रदर्शन पर असमान प्रभाव पड़ सकता है।
IPO का अंतिम मूल्यांकन एंकर बिडिंग फेज के दौरान संस्थागत रुचि और मार्जिन में सुधार और कर्ज कम करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप प्रदान करने की कंपनी की क्षमता पर निर्भर करेगा। निवेशक मैनेजमेंट से इस बात पर कमेंट्री की उम्मीद करेंगे कि नया कैपिटल विस्तार का समर्थन कैसे करेगा और साथ ही मौजूदा सेक्टर-वाइड हेडविंड्स के मुकाबले बैलेंस शीट को कैसे मजबूत करेगा।
