Milky Mist Dairy Food ने ₹2,035 करोड़ का IPO लाने की तैयारी तेज कर दी है। अगर यह IPO सफल होता है, तो यह भारत के डेरी सेक्टर का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बन सकता है। कंपनी इस फंड का इस्तेमाल अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और कर्ज चुकाने के लिए करेगी। निवेशकों को इस पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, खासकर जब हाल ही में लिस्टेड डेरी स्टॉक्स में कमजोरी देखी गई है।
डेरी सेक्टर का सबसे बड़ा IPO!
तमिलनाडु की Milky Mist Dairy Food Ltd. जल्द ही पब्लिक मार्केट में कदम रखने वाली है। कंपनी का लक्ष्य अपने IPO के जरिए करीब ₹2,035 करोड़ जुटाना है। कंपनी की योजना है कि यह IPO जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत तक लॉन्च हो जाए। अगर यह सफल होता है, तो यह भारतीय डेरी इंडस्ट्री के इतिहास का सबसे बड़ा IPO होगा।
IPO में क्या है खास?
इस IPO में ₹1,785 करोड़ के फ्रेश शेयर्स जारी किए जाएंगे, जबकि कंपनी के प्रमोटर्स ₹250 करोड़ के शेयर्स ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचेंगे। इसके अलावा, ₹357 करोड़ तक के प्री-IPO प्लेसमेंट का भी प्रावधान है, जो इश्यू के अंतिम आकार को कम कर सकता है। इस IPO को मैनेज करने के लिए JM Financial Ltd., Axis Capital Ltd., और IIFL Capital Services Ltd. को नियुक्त किया गया है।
फंड का इस्तेमाल
निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा। कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को बढ़ाने पर बड़ा हिस्सा खर्च करने की योजना बना रही है, ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। इसके साथ ही, कुछ फंड का उपयोग मौजूदा कर्ज को चुकाने में किया जाएगा, जिससे कंपनी की ब्याज देनदारी और वित्तीय सेहत में सुधार हो सकता है।
डेरी सेक्टर में मौजूदा हालात
इस IPO का समय भी काफी अहम है, क्योंकि हाल के दिनों में स्टॉक मार्केट में डेरी कंपनियों के प्रदर्शन में नरमी देखी गई है। इस साल Parag Milk Foods Ltd. के शेयर में करीब 20% की गिरावट आई है, वहीं Dodla Dairy Ltd. के शेयर लगभग 11% नीचे आ गए हैं। Hatsun Agro Product Ltd. में भी करीब 7.5% की गिरावट दर्ज की गई है। यह ट्रेंड दिखाता है कि डेरी कंपनियों को लेकर निवेशकों का सेंटिमेंट थोड़ा सतर्क है, जो शायद कच्चे माल की लागत, लॉजिस्टिक्स या बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसे कारणों से हो सकता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
कंपनी के लिए आगे चलकर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में नया निवेश किस तरह से रेवेन्यू ग्रोथ में तब्दील होता है और क्या कर्ज घटाने की रणनीति कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत कर पाती है। दूध की खरीद कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने की क्षमता पर भी नजर रखनी होगी। IPO का वैल्यूएशन, लिस्टेड पियर्स की तुलना में, यह बताएगा कि मौजूदा सेक्टर चुनौतियों के बीच बड़े निवेशक कंपनी की ग्रोथ को लेकर कितना उत्साहित हैं।
