IPO में उमड़ी निवेशकों की भीड़
Mehul Telecom का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 21 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुआ और इसे 41.81 गुना ज़बरदस्त सब्सक्रिप्शन मिला। कुल 20.4 लाख इक्विटी शेयरों के मुकाबले निवेशकों ने 8.52 करोड़ शेयर मांगे। कंपनी ने ₹96 से ₹98 प्रति शेयर के प्राइस बैंड पर ₹27.73 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा था।
नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) ने तो 58.75 गुना बोली लगाई, जो BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग की मजबूत मांग को दर्शाता है। रिटेल इन्वेस्टर्स ने 37.41 गुना और QIBs (Qualified Institutional Buyers) ने 32.5 गुना सब्सक्रिप्शन दिया। हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में महज़ ₹4.5-5.0 का उछाल दिख रहा है, जो इश्यू प्राइस से सिर्फ 3-5% यानी ₹102.5-103 के लिस्टिंग प्राइस का संकेत देता है। यह दिखाता है कि बाजार के जानकार लिस्टिंग वाले दिन बड़े मुनाफे को लेकर थोड़े सतर्क हैं। BSE SME IPO इंडेक्स ने ऐतिहासिक रूप से अच्छे रिटर्न दिए हैं, लेकिन इस सेगमेंट में लिक्विडिटी और वोलेटिलिटी के जोखिम बने रहते हैं।
कंपनी की वित्तीय स्थिति और कॉम्पिटिशन
IPO से जुटाई गई रकम में से ₹22.95 करोड़ (यानी 82.75%) का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल (रोज़मर्रा के कामकाज) को मजबूत करने के लिए किया जाएगा, जबकि बाकी का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए होगा। यह इंगित करता है कि कंपनी का फोकस बड़े विस्तार के बजाय अपने मौजूदा ऑपरेशंस को बेहतर बनाने पर है। IPO के बाद कंपनी का मार्केट कैप ₹102.43 करोड़ होने का अनुमान है।
कंपनी का P/E (प्राइस-टू-अर्निंग) रेशियो 10.86 गुना है, जो इसके मुकाबलेदारों जैसे Fonebox Retail (13.0), Jay Jalaram Technologies (15.8), और Bhatia Communications (20.6) की तुलना में आकर्षक लग रहा है (अप्रैल 2026 की शुरुआत के अनुसार)। लेकिन, मोबाइल रिटेल का बाजार बेहद कॉम्पिटिटिव है। Samsung और Xiaomi जैसी बड़ी ब्रांड्स, साथ ही Amazon और Flipkart जैसे ऑनलाइन दिग्गजों से मार्जिन पर भारी दबाव है। कंपनी का FOFO (Franchisee Owned Franchisee Operated) मॉडल स्केलेबिलिटी के लिए डिज़ाइन किया गया है, वहीं ऑफलाइन रिटेल का अभी भी छोटे शहरों में 60-65% का बड़ा मार्केट शेयर है।
बड़े जोखिम जिन पर ध्यान देना ज़रूरी
भारी सब्सक्रिप्शन के बावजूद, Mehul Telecom के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। एनालिस्ट्स कंपनी के लगातार नेगेटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो को लेकर चिंता जता रहे हैं, जो मुनाफे की सस्टेनेबिलिटी पर सवाल खड़े करता है। दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में ट्रेड रिसीवेबल्स में 170% का उछाल आया है, जो रेवेन्यू ग्रोथ से कहीं ज़्यादा है। यह संभावित कलेक्शन इश्यू या आक्रामक अकाउंटिंग की ओर इशारा कर सकता है।
बिजनेस का 98-99% हिस्सा सिर्फ गुजरात से आता है, और उसमें भी राजकोट अकेले 65% से ज़्यादा रेवेन्यू जेनरेट करता है। यह ज्योग्राफिक कंसंट्रेशन (भौगोलिक एकाग्रता) एक बड़ा रिस्क है। प्रमोटर्स ने IPO से काफी पहले शेयर्स ₹0.16 में खरीदे थे, जबकि IPO प्राइस ₹98 है। यह वैल्यूएशन जंप निवेशकों के लिए जांच का विषय है। कंपनी का इन्वेंटरी-हैवी मॉडल ₹24 करोड़ से ज़्यादा का स्टॉक बांधे रखता है, जिससे वर्किंग कैपिटल पर दबाव पड़ता है। साथ ही, स्मार्टफोन बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी और कंज्यूमर सेंटिमेंट में सावधानी के चलते 9% की गिरावट दर्ज की गई थी (2026 की शुरुआत में)।
एनालिस्ट्स की सतर्क राय
एनालिस्ट्स इस IPO को लेकर मिली-जुली राय दे रहे हैं। उनका कहना है कि कंपनी FY25 में ₹7.07 करोड़ का प्रॉफिट कमाने में कामयाब रही, जबकि पिछले साल छोटा लॉस था। हालांकि, लगातार कैश फ्लो की समस्याएँ और बढ़ता रिसीवेबल्स चिंता का मुख्य कारण बने हुए हैं। कुछ की सलाह है कि केवल अच्छी तरह से सूचित, पर्याप्त कैश वाले और जोखिम उठाने में सक्षम निवेशक ही मध्यम अवधि के लिए इसमें सोच-समझकर निवेश करें। कुल मिलाकर, यह IPO एक हाई-रिस्क, स्पेकुलेटिव अवसर के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें निवेश से पहले नेगेटिव कैश फ्लो और भौगोलिक निर्भरता जैसे मुद्दों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना ज़रूरी है।
