Laxyo Energy IPO: रेलवे इंफ्रा कंपनी को SEBI की हरी झंडी, ₹150 करोड़ जुटाएगी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Laxyo Energy IPO: रेलवे इंफ्रा कंपनी को SEBI की हरी झंडी, ₹150 करोड़ जुटाएगी

रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Laxyo को SEBI से ₹150 करोड़ के IPO के लिए मंजूरी मिल गई है। कंपनी इस पैसे का इस्तेमाल अपना कर्ज कम करने और कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) में करेगी।

मध्य प्रदेश की इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Laxyo को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) को आगे बढ़ाने की मंजूरी मिल गई है। यह कंपनी रेलवे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) सेवाओं में माहिर है और फ्रेश इक्विटी शेयर्स जारी करके ₹150 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखती है। इस नियामक मंजूरी के साथ, कंपनी अगले बारह महीनों के भीतर कभी भी अपना पब्लिक इश्यू लॉन्च कर सकती है।

IPO फंड का इस्तेमाल और कर्ज की स्थिति

इस फंड जुटाने का मुख्य उद्देश्य कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत करना और ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करना है। इस राशि का एक बड़ा हिस्सा, लगभग ₹70 करोड़, बकाया कर्ज के भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। मार्च 2026 तक, कंपनी पर कुल ₹121.7 करोड़ का कर्ज था, जिसका मतलब है कि IPO से कर्ज चुकाने की लागत में काफी कमी आ सकती है और वित्तीय लचीलापन बढ़ सकता है।

कर्ज कम करने के अलावा, Laxyo ₹9.7 करोड़ नई इक्विपमेंट खरीदने के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) पर खर्च करने की योजना बना रही है। इसके अतिरिक्त, ₹23 करोड़ वर्किंग कैपिटल (Working Capital) के लिए रखे गए हैं, जो कंपनी के चालू प्रोजेक्ट्स को चलाने के लिए दैनिक नकदी की जरूरतों को पूरा करेंगे। कंपनी ₹30 करोड़ तक के प्री-IPO प्लेसमेंट पर भी विचार कर सकती है, जिससे पब्लिक के लिए पेश किए जाने वाले फ्रेश इश्यू का कुल आकार कम हो जाएगा।

बिजनेस मॉडल और रेवेन्यू का फोकस

Laxyo माइनिंग सर्विसेज, ड्रेजिंग और इंडस्ट्रियल प्लांट मेंटेनेंस जैसे कई स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग सेगमेंट में काम करती है। हालांकि, इसका रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस ही इसकी वित्तीय परफॉर्मेंस का मुख्य इंजन है। यह सेगमेंट, जिसमें ट्रैक बिछाना और मशीनीकृत रखरखाव जैसे जटिल काम शामिल हैं, फाइनेंशियल ईयर 2025 में कंपनी के कुल रेवेन्यू का 66% था। सितंबर 2025 को समाप्त छह महीनों के दौरान भी यह योगदान 63% पर ऊंचा बना रहा।

निवेशकों के लिए, रेलवे सेगमेंट पर यह निर्भरता का मतलब है कि कंपनी का विकास सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्चों और पब्लिक व प्राइवेट क्लाइंट्स से मिलने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स के स्थिर प्रवाह से closely tied है। रेलवे प्रोक्योरमेंट नीतियों में बदलाव या प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में देरी कंपनी के भविष्य के रेवेन्यू को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकती है।

Indorient Financial Services को इस ऑफर के लिए एकमात्र बुक-रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है। कंपनी के लिए अगला कदम शेयर बिक्री के समय का निर्धारण करना होगा, जो मौजूदा बाजार स्थितियों और वैल्यूएशन तथा संभावित प्री-IPO प्लेसमेंट के संबंध में आंतरिक प्रबंधन निर्णयों पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.