LCC Projects का IPO **11 सितंबर** को **7.10 गुना** सब्सक्राइब होने के साथ बंद हो गया। गुजरात स्थित यह कंपनी कर्ज घटाने और नए उपकरणों की खरीद के लिए जुटाई गई राशि का उपयोग करेगी। अब निवेशकों की नजर **17 सितंबर** को होने वाली लिस्टिंग पर टिकी है।
IPO की पूरी गणित
इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) क्षेत्र की कंपनी LCC Projects का IPO 11 सितंबर, 2026 को सफलतापूर्वक बंद हो गया। कंपनी इस इश्यू के जरिए कुल ₹427.14 करोड़ जुटाने का लक्ष्य लेकर बाजार में उतरी थी, जिसके लिए प्राइस बैंड ₹139 से ₹146 प्रति शेयर तय किया गया था।
फंड का इस्तेमाल और फाइनेंशियल फोकस
कुल इश्यू साइज में ₹258 करोड़ नए शेयरों के जरिए जुटाए जाएंगे, जबकि ₹169.14 करोड़ ऑफर फॉर सेल (OFS) का हिस्सा हैं। कंपनी के प्लान के मुताबिक, जुटाई गई राशि में से ₹180 करोड़ का उपयोग सीधे कर्ज चुकाने में किया जाएगा, ताकि बैलेंस शीट को मजबूत बनाया जा सके। इसके अलावा, ₹15 करोड़ नई कंस्ट्रक्शन मशीनरी खरीदने में निवेश किए जाएंगे।
बिजनेस रिस्क और चुनौतियां
LCC Projects मुख्य रूप से वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बांध, वियर्स और पाइपिंग नेटवर्क का काम करती है। हालांकि कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड लंबा है, लेकिन EPC सेक्टर में सरकारी प्रोजेक्ट्स पर निर्भरता एक बड़ा रिस्क है। सरकारी बजट में देरी या पॉलिसी में बदलाव कंपनी के रेवेन्यू फ्लो को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस में कैश फ्लो का प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण होता है, जहां पेमेंट में देरी सीधे वर्किंग कैपिटल पर दबाव डालती है।
लिस्टिंग की तैयारी
कंपनी के शेयर 17 सितंबर, 2026 को BSE और NSE पर लिस्ट होंगे। हालांकि ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में 34% तक के लिस्टिंग गेन की चर्चा थी, लेकिन निवेशकों को यह समझना चाहिए कि ग्रे मार्केट अनरेगुलेटेड और अस्थिर होता है। लिस्टिंग के दिन वास्तविक भाव इन अनुमानों से अलग हो सकते हैं। आने वाले समय में कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कितनी कुशलता से अपने कर्ज को कम करती है और नए सरकारी ऑर्डर हासिल करती है।
