Kusumgar Limited का ₹650 करोड़ का IPO आज बंद हो गया और इसे नॉन-इंस्टीट्यूशनल और रिटेल निवेशकों से भारी दिलचस्पी मिली, जिसके चलते यह 14 गुना सब्सक्राइब हुआ। कंपनी को डिफेंस ऑर्डर में देरी और अमेरिकी टैरिफ जैसी छोटी-मोटी चुनौतियों का सामना है, लेकिन इंजीनियरिंग फैब्रिक्स में विस्तार पर मुख्य फोकस बना हुआ है। शेयरों की लिस्टिंग 15 जुलाई को BSE और NSE पर होने की उम्मीद है।
IPO में निवेशकों का उत्साह
Kusumgar Limited के इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) में निवेशकों ने आज जमकर पैसा लगाया। ₹650 करोड़ के इस इश्यू को कुल 1.14 करोड़ शेयरों के मुकाबले 16.56 करोड़ शेयरों के लिए बिड मिले। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) ने अपने कोटे से 42 गुना ज्यादा आवेदन करके सबसे ज्यादा उत्साह दिखाया, वहीं रिटेल निवेशकों ने अपने लिए आरक्षित हिस्से के मुकाबले लगभग 10 गुना सब्सक्रिप्शन हासिल किया। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) ने 2.19 गुना और कर्मचारियों के सेगमेंट ने लगभग 4 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया।
कंपनी की वित्तीय स्थिति और बिजनेस
यह IPO एक ऑफर फॉर सेल (OFS) है, यानी कंपनी को इस प्रक्रिया से कोई नया पैसा नहीं मिलेगा, सारा पैसा प्रमोटर्स को जाएगा। पिछले दो सालों में कंपनी की कमाई में बढ़ोतरी देखी गई है, जहां रेवेन्यू ₹467.9 करोड़ (FY24) से बढ़कर ₹692 करोड़ (FY26) हो गया। नेट प्रॉफिट भी इसी अवधि में ₹84.3 करोड़ से बढ़कर ₹98.2 करोड़ हुआ।
हालांकि, लेटेस्ट नतीजों में थोड़ी नरमी दिखी है। FY26 में कंपनी के रेवेन्यू और प्रॉफिट में साल-दर-साल गिरावट आई है। कंपनी के अनुसार, इसका मुख्य कारण कुछ डिफेंस ऑर्डर का टल जाना और अमेरिकी टैरिफ का एक्सपोर्ट बिजनेस पर असर रहा है। यह कंपनी की खास एक्सपोर्ट मार्केट और सरकारी डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भरता से जुड़े जोखिमों को दिखाता है।
सेक्टर में कंपनी की पोजिशन और भविष्य
Kusumgar इंजीनियरिंग फैब्रिक्स के क्षेत्र में काम करती है और एयरोस्पेस, डिफेंस, ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए प्रोडक्ट्स सप्लाई करती है। कंपनी के पास विविध प्रोडक्ट्स और इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं हैं। इस इंडस्ट्री में लंबे समय तक ग्रोथ की उम्मीद है, जहां घरेलू इंजीनियरिंग फैब्रिक्स मार्केट FY31 तक ₹21.1 बिलियन और ग्लोबल मार्केट 2030 तक $112.2 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
निवेशकों को कंपनी के ऑर्डर बुक की अस्थिरता और इंटरनेशनल ट्रेड पॉलिसीज को मैनेज करने की क्षमता पर नजर रखनी चाहिए। डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भरता के कारण रेवेन्यू में उतार-चढ़ाव आ सकता है। साथ ही, कंपनी की क्षमता यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह टैरिफ से जुड़ी लागतों को अपने प्रोडक्ट मिक्स से या नए भौगोलिक क्षेत्रों में विस्तार करके कैसे ऑफसेट करती है।
बिडिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद, अलॉटमेंट का आधार 13 जुलाई को फाइनल होने की उम्मीद है। शेयर अप्लाई करने वाले निवेशकों को 14 जुलाई तक डीमैट अकाउंट में शेयर दिखने या बैंक अकाउंट में रिफंड आने की उम्मीद करनी चाहिए। कंपनी के इक्विटी शेयरों की ट्रेडिंग 15 जुलाई को BSE और NSE पर शुरू होगी।
