Kusumgar Corporates ने अपने IPO का शेयर अलॉटमेंट आज फाइनल कर दिया है। यह इश्यू **128.85** गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था। **15** जुलाई को शेयर बाजार में लिस्ट होने वाले हैं। निवेशक रजिस्ट्रार Bigshare Services के जरिए अपना अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं।
Kusumgar IPO: आज फाइनल हुआ अलॉटमेंट
Kusumgar Corporates शेयर बाजार में 15 जुलाई 2026, बुधवार को डेब्यू करने के लिए तैयार है। कंपनी ने आज, 13 जुलाई को IPO का अलॉटमेंट फाइनल कर दिया है। जिन निवेशकों ने 650 करोड़ रुपये के इस पब्लिक इश्यू में पैसा लगाया था, वे अब रजिस्ट्रार Bigshare Services Pvt Ltd की वेबसाइट पर या BSE और NSE के ऑफिशियल पोर्टल्स पर जाकर अपना अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं।
IPO में दिखा जबरदस्त क्रेज
यह इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 10 जुलाई को बंद हुआ था और निवेशकों ने इसमें जमकर पैसा लगाया। इश्यू 128.85 गुना सब्सक्राइब हुआ, जो कि बाजार में इस इश्यू की जबरदस्त डिमांड को दिखाता है। खासकर, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) ने 284.10 गुना, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) ने 165.46 गुना सब्सक्रिप्शन दिखाया। रिटेल निवेशकों का हिस्सा भी 26.47 गुना सब्सक्राइब हुआ।
यह 'ऑफर फॉर सेल' इश्यू था
यह ध्यान रखना अहम है कि 650 करोड़ रुपये का यह इश्यू पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (Offer for Sale - OFS) था। इसका मतलब है कि IPO से जुटाई गई रकम सीधे कंपनी के पास नहीं जाएगी, बल्कि यह उन शेयरधारकों को मिलेगी जो अपने स्टेक बेच रहे हैं। यानी, कंपनी की बैलेंस शीट और कैश फ्लो पर इस IPO का कोई सीधा असर नहीं होगा।
रिफंड और डीमैट में शेयर
जिन निवेशकों को शेयर अलॉट नहीं हुए हैं, उनके रिफंड की प्रक्रिया 14 जुलाई 2026 को शुरू हो जाएगी। वहीं, सफल आवेदकों के डीमैट अकाउंट में शेयर इसी तारीख तक क्रेडिट हो जाएंगे, जिसके बाद 15 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंज पर इनकी लिस्टिंग होगी।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
हालांकि, इतना ज्यादा सब्सक्रिप्शन अक्सर मजबूत बाजार सेंटिमेंट का संकेत देता है, लेकिन लिस्टिंग के दिन शेयर का प्रदर्शन कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे कि सेक्टर की चाल और उस समय का बाजार का माहौल। चूंकि यह OFS है, कंपनी की कैपिटल स्पेंडिंग या डेट पोजीशन पर इसका कोई असर नहीं होगा। अलॉटमेंट पाने वाले निवेशक कंपनी के आने वाले तिमाही नतीजों और मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रख सकते हैं ताकि कंपनी की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्ट्रेटेजी को समझ सकें।
