प्रमोटरों का प्रीमियम दांव और वैल्यूएशन
OnEMI Technology Solutions, जो डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म Kissht के नाम से जानी जाती है, 30 अप्रैल, 2026 को अपना ₹926 करोड़ का IPO लॉन्च करने की तैयारी में है। IPO के ऊपरी प्राइस बैंड ₹171 प्रति शेयर के हिसाब से कंपनी का वैल्यूएशन लगभग ₹2,881 करोड़ है। कंपनी का पोस्ट-IPO प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 10.84 गुना है, जो फिनटेक सेक्टर के औसत 52.32 गुना P/E से काफी कम है। खास बात यह है कि कंपनी का वैल्यूएशन उसकी बुक वैल्यू से भी कम है।
अपने भरोसे को जताने के लिए, प्रमोटर रणवीर सिंह और कृष्णन विश्वनाथन ₹201 प्रति शेयर के भाव पर लगभग ₹40 करोड़ का निवेश कर रहे हैं। यह दर IPO बैंड से ऊपर है। इस कदम का मकसद प्रमोटर डाइल्यूशन और कंपनी के वैल्यूएशन को लेकर निवेशकों की चिंताओं को कम करना है।
रेवेन्यू और प्रॉफिट में गिरावट
Kissht ने अपने एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) को FY23 के ₹1,267 करोड़ से बढ़ाकर 9MFY26 तक ₹5,955 करोड़ कर लिया है। लेकिन इस ग्रोथ के साथ वित्तीय चुनौतियां भी बढ़ी हैं। FY25 में कंपनी का रेवेन्यू 20% से अधिक घटकर ₹1,337.46 करोड़ रह गया, जबकि FY24 में यह ₹1,674.44 करोड़ था। नेट प्रॉफिट भी 18.6% गिरकर ₹160.6 करोड़ हो गया, जबकि FY24 में यह ₹197.2 करोड़ था। वहीं, फाइनेंस लागत दोगुनी से ज्यादा होकर FY25 में ₹164.4 करोड़ पर पहुंच गई, जिसने प्रॉफिट पर भारी असर डाला।
इसके अलावा, कंपनी ने अपने लोन बुक में भी बदलाव किया है। अब लॉन्ग-टर्म प्रोडक्ट्स लोन बुक का 95% हिस्सा हैं, जो एक साल पहले यानी मार्च 2025 तक 65% था।
बढ़ते NPA का बढ़ता जोखिम
OnEMI Technology Solutions के लिए सबसे बड़ी चिंता एसेट क्वालिटी को लेकर है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPAs) FY23 के मामूली 0.05% से बढ़कर FY24 में 0.79% और फिर FY25 में 2.89% हो गए हैं। यह इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि कंपनी की 94% AUM असुरक्षित (unsecured) लोन पर आधारित है। प्रोविजन कवरेज भी FY25 में घटकर 91.48% रह गया, जो पिछली अवधियों में 100% था।
वित्तीय ढांचे पर दबाव
कंपनी के वित्तीय ढांचे में और भी जोखिम दिखते हैं। इसका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 1.63 है। बौरोइंग्स FY23 के ₹388 करोड़ से बढ़कर 9MFY26 तक ₹2,048 करोड़ हो गई हैं। कंपनी ने 9MFY26 में ₹661 करोड़ और FY25 में ₹825 करोड़ का नेगेटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो रिपोर्ट किया है। आकस्मिक देनदारियां (contingent liabilities) ₹1,279 करोड़ हैं, और वर्किंग कैपिटल डेज़ 360 दिनों से बढ़कर 509 दिन हो गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनी पर कर्ज का बोझ ज्यादा है और उसे बढ़ते क्रेडिट कॉस्ट और कैश जनरेशन में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
मार्केट का बदलता रुख
भारतीय फिनटेक लेंडिंग सेक्टर में बदलाव आ रहा है। निवेशक अब असुरक्षित लोन के बजाय सुरक्षित (secured) लेंडिंग मॉडल्स को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं, और प्रॉफिटेबिलिटी पर जोर बढ़ रहा है। इस माहौल में, Kissht का असुरक्षित लोन पोर्टफोलियो चिंता का विषय बन सकता है। कई फिनटेक कंपनियां नियामक बदलावों का सामना कर रही हैं, जिससे उनके विस्तार पर असर पड़ रहा है।
